बजट का लालीपॉप और गायब जनप्रतिनिधि

✒️लाल टोपी राजू सोनी
राज्य का बजट पेश हुआ तो लगा मानो घोषणाओं की ऐसी बरसात हुई है कि खेतों में धान नहीं, सीधे विकास उग आएगा। करोड़ों-अरबों की योजनाएं, मिशन मोड, इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स, स्पोर्ट्स अकादमी, अस्पताल, लाइब्रेरी—कागज पर छत्तीसगढ़ किसी मिनी सिंगापुर से कम नहीं दिखता। लेकिन जमीनी हकीकत पूछिए तो पंचायत भवन के बाहर घास उग आई है और ताला जंग खा रहा है।
एक साल बीत गया। गांव की टूटी सड़क अब भी वैसी ही है, हैंडपंप की मरम्मत का प्रस्ताव फाइलों में ध्यान योग कर रहा है, और नाली निर्माण का शिलान्यास पत्थर खुद शर्म से झुक गया है। सरपंच जी मिलते नहीं, जनपद सदस्य फोन उठाते नहीं, जिला पंचायत सदस्य का पता पूछिए तो लोग कहते हैं—“चुनाव के बाद दर्शन दुर्लभ हो गए हैं।” जनता ढूंढती फिर रही है और जनप्रतिनिधि ऐसे गायब हैं जैसे बजट की पारदर्शिता।
बजट में कृषि पंपों के लिए हजारों करोड़, सड़कों के लिए भारी भरकम राशि, स्वास्थ्य और उद्योग के लिए नई-नई घोषणाएं। पर पंचायत में पूछिए तो जवाब मिलता है—“राशि स्वीकृत है, बस प्रक्रिया चल रही है।” यह प्रक्रिया शायद कछुए की चाल से भी धीमी है, क्योंकि गांव में विकास की गाड़ी पंचर पड़ी है।
हद तो तब होती है जब हर योजना का नाम इतना आकर्षक होता है कि सुनते ही लगे अब तो गांव बदल जाएगा। लेकिन बदलता क्या है? सिर्फ पोस्टर। दीवारों पर रंगीन बैनर, सोशल मीडिया पर बधाई संदेश, और जमीनी स्तर पर वही पुरानी कहानी—“फाइल ऊपर गई है।” ऊपर कहां? यह सवाल पूछना भी अब असभ्यता माना जाता है।
गांव की चौपाल में बुजुर्ग पूछते हैं—“इतना पैसा आया कहां?” कोई धीरे से कान में कह देता है—“कहीं ये बजट की मिठास पश्चिम बंगाल के चुनावी रसगुल्लों में तो नहीं घुल रही?” अब यह तो बड़े लोग जानें, लेकिन गांव का खजाना खाली क्यों है, यह सवाल हर चाय दुकान पर गूंज रहा है।
जनता को हर साल बजट का लालीपॉप थमा दिया जाता है। रंग-बिरंगा, मीठा और आकर्षक। लेकिन जैसे ही चखने की बारी आती है, पता चलता है कि डंडी हाथ में है, मिठास हवा में। छत्तीसगढ़ की जनता अब पूछ रही है—क्या विकास सिर्फ भाषणों में होगा या कभी पंचायत की मिट्टी भी इसे महसूस करेगी?
एक साल में अगर पंचायत में गड्ढे ही गहरे हुए हैं और जिम्मेदार चेहरे और भी धुंधले, तो सवाल उठना लाजिमी है। बजट की घोषणाएं तभी सार्थक होंगी जब गांव की सड़क सचमुच बने, अस्पताल में डॉक्टर बैठे, युवाओं को रोजगार मिले और जनप्रतिनिधि जनता से आंख मिलाकर जवाब दें।
वरना हर साल यही होगा—बजट आएगा, तालियां बजेंगी, पोस्टर छपेंगे, और गांव का विकास अगली घोषणा तक स्थगित रहेगा। छत्तीसगढ़ में बजट का लालीपॉप घूमता रहेगा, और जनता मीठे वादों की कैलोरी गिनती

✒️लाल टोपी राजू सोनी
राजनांदगांव, दुर्गा चौक कालेज रोड 8319361119