
राजनांदगांव।जिले के छुरिया विकासखंड सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेदिक चिकित्सा को नई पहचान दिलाने वाले आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. अनिरुद्ध कुमार पटेल आज लोगों के लिए किसी भगवान से कम नहीं माने जाते। बीते लगभग 20 वर्षों से निरंतर आयुर्वेदिक पद्धति से मरीजों का उपचार करते हुए उन्होंने सेवा, समर्पण और मानवता का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
मूलतः रायगढ़ जिले से आए डॉ. पटेल ने राजनांदगांव को अपनी कर्मभूमि बनाते हुए शासन द्वारा दिए गए हेड क्वार्टर में रहकर चौबीसों घंटे मरीजों की सेवा का संकल्प लिया और आज भी उसी समर्पण के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दिन-रात किसी भी समय मरीज उनके पास पहुंचता है तो वे बिना थके उसका उपचार करते हैं। यही कारण है कि ग्रामीण अंचल के लोग उन्हें डॉक्टर नहीं, बल्कि भगवान का दर्जा देते हैं।
डॉ. अनिरुद्ध कुमार पटेल ने अपने सेवा काल में अनेक गंभीर रोगियों का सफल उपचार कर आयुर्वेदिक चिकित्सा की प्रभावशीलता को सिद्ध किया है। वर्तमान में वे चार आयुर्वेदिक औषधालयों की जिम्मेदारी संभालते हुए छुरिया ब्लॉक के प्रभारी के रूप में भी कार्यरत हैं। उनके नेतृत्व में पूरा छुरिया विकासखंड आयुर्वेदिक चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी बनता जा रहा है और ग्रामीणों का आयुर्वेद के प्रति विश्वास लगातार बढ़ रहा है।
बताया जाता है कि डॉ. पटेल ने लगभग 20 वर्षों तक संविदा सेवा में रहते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेदिक चिकित्सा के प्रचार-प्रसार और उपचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया, जिससे हजारों मरीजों को लाभ मिला है।
इस संबंध में प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने शासन से मांग की है कि डॉ. अनिरुद्ध कुमार पटेल जैसे समर्पित आयुर्वेदिक चिकित्सकों को राज्यपाल के हाथों प्रतिष्ठित पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे सेवा भावी डॉक्टरों को सम्मान मिलने से अन्य चिकित्सकों को भी प्रेरणा मिलेगी और आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा मिलेगा।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यदि डॉ. अनिरुद्ध कुमार पटेल जैसे व्यक्तित्व को राज्यपाल सम्मान प्राप्त होता है तो प्रदेश के आयुर्वेदिक संविदा कर्मचारियों में भी खुशी की लहर दौड़ जाएगी और उन्हें समाज सेवा के लिए नई प्रेरणा मिलेगी। शासन को चाहिए कि ऐसे उत्कृष्ट चिकित्सकों के योगदान को सम्मानित कर आयुर्वेद के विकास को नई दिशा प्रदान करे।
