विफल युवाओं की अनदेखी समाज के लिए खतरे की घंटी – समय रहते संभले शासन-प्रशासन

सफलता से ज्यादा असफलता को समझने की जरूरत – युवाओं के मानसिक तनाव पर संवेदनशील नीति बने

रायपुर।“ध्यान रखना, सफल होने वाले युवाओं से ज्यादा विफल होने वाले युवाओं पर सर्व समाज और शासन-प्रशासन को ध्यान देना चाहिए, क्योंकि सफल युवाओं की तुलना में असफल युवाओं की संख्या कई गुना अधिक है।” यह गंभीर लेकिन कड़वा सच प्रदेश सचिव श्याम गुप्ता (प्रेस रिपोर्टर क्लब) ने अपने संदेश में व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि आज का युवा प्रतिस्पर्धा, बेरोजगारी, पारिवारिक दबाव और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच मानसिक तनाव से जूझ रहा है। जो युवा सफलता की राह पर आगे बढ़ जाते हैं, वे समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं, लेकिन जो युवा असफल हो जाते हैं, वे अक्सर निराशा, अवसाद और भ्रम की स्थिति में पहुंच जाते हैं। ऐसे में कई बार उनकी मजबूरियां उन्हें यह समझने का अवसर ही नहीं देतीं कि वे जो कदम उठा रहे हैं, वह वैध है या अवैध।

श्याम गुप्ता ने कहा कि समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी सिर्फ उपलब्धियों का जश्न मनाना नहीं, बल्कि असफल और भटके हुए युवाओं को सही दिशा देना भी है। यदि समय रहते मानसिक परामर्श, रोजगार मार्गदर्शन और सामाजिक सहयोग की मजबूत व्यवस्था बनाई जाए, तो अनेक युवा गलत रास्तों पर जाने से बच सकते हैं।

उन्होंने अपील की कि स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से काउंसलिंग व्यवस्था को सशक्त किया जाए, ताकि युवाओं को असफलता से उबरने की मानसिक शक्ति मिल सके।

अंत में उन्होंने कहा कि “युवाओं को केवल सफलता की कहानी नहीं, बल्कि असफलता से सीखने और फिर से उठ खड़े होने की ताकत भी सिखाई जानी चाहिए। यही सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माण का मार्ग है।”