

बिलासपुर। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) कार्यक्रम अधिकारियों के सात दिवसीय प्रशिक्षण के छठे दिन दो महत्वपूर्ण सत्र संपन्न हुए। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती पूजन और डॉ. नेहा जैन द्वारा पिछले दिन की गतिविधियों के फीडबैक के साथ हुई।
प्रथम सत्र: व्यक्तित्व विकास और नेतृत्व क्षमता
मुख्य अतिथि डॉ. संजय तिवारी (ओएसडी, माननीय उच्च शिक्षा मंत्री प्रतिनिधि) ने अपने उद्बोधन में व्यक्तित्व विकास और प्रभावी संवाद कौशल पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि एनएसएस के माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। उन्होंने कार्यक्रम अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे विद्यार्थियों के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम आयोजित करें और शिविरों के दौरान सुरक्षा एवं बेहतर प्रबंधन को प्राथमिकता दें। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मनोज सिन्हा ने अतिथियों का स्वागत उद्बोधन, प्रशिक्षण सहायक डॉ. रीना ताम्रकार, यूपेश कुमार द्वारा परिचय प्रस्तुत किया गया।
द्वितीय सत्र: पर्यावरण और सामाजिक उत्तरदायित्व
द्वितीय सत्र में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के डॉ. पी. एल. चंद्राकर ने व्याख्यान दिया। उन्होंने ‘ईशावास्यमिदं सर्वम्’ श्लोक के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझाया। डॉ. चंद्राकर ने मनुष्य और पर्यावरण के संबंधों की पाँच प्रमुख धारणाओं—दासता से लेकर सहजीवन (Symbiosis)—पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने छत्तीसगढ़ की मिट्टी, महानदी की वर्तमान स्थिति और पर्यावरण संबंधी नियमों की जानकारी देते हुए स्वयंसेवकों को सजग और चरित्रवान बनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर प्रशिक्षण ले रहे कार्यक्रम अधिकारी, संकाय सदस्य और आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे। दोनों ही सत्रों ने प्रतिभागियों को सामाजिक सेवा और सामुदायिक विकास के लिए नई ऊर्जा प्रदान की। तृतीय सत्र में सहोरिक यादव, नायब तहसीलदार (बेलतरा) मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे, जिन्होंने स्वच्छता एवं गुड गवर्नेंस पर अपने विचार प्रकट करते हुए रोचक गतिविधियों के माध्यम से उत्सावर्धन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन सुभाष चंद्र बोस दल द्वारा किया गया। तत्पश्चात् शैक्षणिक भ्रमण हेतु क्रोकोड़ाईल पार्क (कोटमी सोनार ) का भ्रमण कर प्राकृतिक सौन्दर्य का आनंद लेते हुए प्रकृति के प्रति सदभाव व्यक्त किया गया।उपरोक्त भ्रमण में कार्यक्रम अधिकारी वीरेंद्र बंजारे का सक्रिय सहयोग रहा।
