पश्चिम बंगाल चुनाव में जीत के प्रमुख रणनीतिकारों में उभरे डॉ मनीष राय

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक सफलता के बाद संगठन स्तर पर कई नाम चर्चा में हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ से जुड़े डॉ मनीष राय को भी महत्वपूर्ण रणनीतिकार और संगठनकर्ता के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से पश्चिम बंगाल में संगठन विस्तार, जनजागरण और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाने वाले डॉ मनीष राय को चुनावी सफलता के प्रमुख नायकों में गिना जा रहा है।

चुनाव आयोग द्वारा दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को संपन्न कराए गए विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुए। केंद्रीय सुरक्षा बल, सीमा सुरक्षा बल और राज्य पुलिस प्रशासन की निगरानी में चुनाव प्रक्रिया पूरी हुई। चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए गए, जबकि एक सीट फाल्ता का परिणाम 24 मई को सामने आया। भाजपा ने 208 सीटों पर जीत दर्ज कर पश्चिम बंगाल में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई। मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सुवेंदु अधिकारी को सौंपी गई।

बताया जा रहा है कि डॉ मनीष राय वर्ष 2016 से पश्चिम बंगाल में संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। उस समय भाजपा राज्य में बेहद सीमित राजनीतिक स्थिति में थी और केवल कुछ सीटों तक सिमटी हुई थी। हावड़ा जिले से संगठन कार्य शुरू करने वाले डॉ मनीष राय को बाद में अलग-अलग जिलों में जनजागरण, संपर्क और संगठन विस्तार की जिम्मेदारियां दी गईं।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले टीएमसी के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय के भाजपा में आने की रणनीति और संवाद प्रक्रिया में भी डॉ मनीष राय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके बाद भाजपा ने लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करते हुए पश्चिम बंगाल में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।

वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में डॉ मनीष राय को हावड़ा जिले की 16 विधानसभा सीटों का दायित्व सौंपा गया था। उस चुनाव में भाजपा ने राज्यभर में 77 सीटें जीतकर अपनी राजनीतिक ताकत का बड़ा संकेत दिया था। हालांकि चुनावी हिंसा, बूथ कब्जाने और कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच पार्टी सत्ता तक नहीं पहुंच सकी।

राजनीतिक गतिविधियों के दौरान डॉ मनीष राय पर कई बार हमले होने और डराने-धमकाने के प्रयास भी किए गए, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने संगठन कार्य जारी रखा। वर्ष 2021 के बाद वे लगातार संगठन के निर्देशानुसार अलग-अलग जिलों में जनसंपर्क और जागरण अभियान में सक्रिय रहे।

बताया गया कि 2026 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की सर्वे समिति के साथ मिलकर उन्होंने पूर्व चुनावों में सामने आई कमजोरियों, बूथ प्रबंधन और चुनावी गड़बड़ियों से जुड़े बिंदुओं की विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाई। इसका असर चुनावी रणनीति में भी दिखाई दिया।

इस बार डॉ मनीष राय को पूर्व वर्धमान और हुगली जिले का दायित्व सौंपा गया था। चुनाव परिणामों में पूर्व वर्धमान की 16 में से 14 और हुगली की 18 में से 16 सीटों पर भाजपा की जीत ने संगठनात्मक मजबूती को दर्शाया। विशेष रूप से सिंगुर विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी डॉ अरूप कुमार दास ने टीएमसी के कृषि मंत्री को लगभग 22 हजार मतों से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जिसे संगठन की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

डॉ मनीष राय ने इस सफलता का श्रेय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व, संगठन कार्यकर्ताओं और चुनावी टीम को दिया है। उन्होंने कहा कि यह जीत सामूहिक संगठन शक्ति, कार्यकर्ताओं की मेहनत और वरिष्ठों के मार्गदर्शन का परिणाम है।