राजनांदगांव में सोनोग्राफी माफिया बेलगामCMHO की चुप्पी पर सवाल – कार्रवाई नहीं हुई तो जन आंदोलन करेगा प्रेस रिपोर्टर क्लब

राजनांदगांव (संस्कारधानी)।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों में जबरन भेजे जाने का मामला अब केवल आरोप नहीं, बल्कि दस्तावेज़ी साक्ष्यों की ओर बढ़ता गंभीर स्वास्थ्य घोटाला बनता जा रहा है। आरएमए, सीएचओ, आरएचओ स्तर के कुछ स्वास्थ्यकर्मियों और निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच कमीशन आधारित गठजोड़ की आशंका लगातार गहराती जा रही है।
इसके बावजूद अब तक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) द्वारा कोई ठोस, सार्वजनिक और पारदर्शी कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
CMHO की निष्क्रियता पर सीधे सवाल
प्रेस रिपोर्टर क्लब का स्पष्ट सवाल है कि—
जब ग्रामीण गर्भवती महिलाओं के पास डायग्नोस्टिक सेंटर की पर्ची एवं सोनोग्राफी रिपोर्ट मौजूद हैं,
जब प्रत्येक सोनोग्राफी के लिए एफ-फॉर्म भरना और सुरक्षित रखना कानूनन अनिवार्य है,
जब सामान्य गर्भावस्था में बार-बार सोनोग्राफी कराना स्वयं पीसी-पीएनडीटी एक्ट का उल्लंघन है,
तो फिर CMHO कार्यालय अब तक चुप क्यों है?
क्या यह प्रशासनिक शिथिलता है या फिर मामले को दबाने का प्रयास?
कलर सोनोग्राफी के नाम पर आर्थिक शोषण
प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में किए जा रहे भौतिक सत्यापन और गर्भवती महिलाओं से प्रत्यक्ष संवाद के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि—
महिलाओं को 5, 6, 7 बार तक सोनोग्राफी के लिए भेजा गया
बार-बार कलर सोनोग्राफी कराने का दबाव बनाया गया
“बच्चा आड़ा है”, “पानी कम है”, “खतरा है” जैसे शब्दों से डराकर जांच करवाई गई
यह स्थिति महिलाओं के आर्थिक शोषण और मानसिक उत्पीड़न की ओर इशारा करती है।
जल्द सामने आएगा दस्तावेज़ों का पूरा पुलिंदा
प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने स्पष्ट किया कि—
“बहुत जल्द राजनांदगांव के एक प्रतिष्ठित निजी डायग्नोस्टिक सेंटर की रेफरल पर्ची, सोनोग्राफी रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज़ों के साथ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को औपचारिक शिकायत दी जाएगी।
साथ ही यह शिकायत स्वास्थ्य मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन को भी प्रेषित की जाएगी।”
उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रेस रिपोर्टर क्लब द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में भौतिक सत्यापन किया जा रहा है और गर्भवती महिलाओं से प्रत्यक्ष रूप से तथ्य एकत्र किए जा रहे हैं।
इन सभी तथ्यों और दस्तावेज़ों का पूरा पुलिंदा CMHO एवं जिला कलेक्टर को सौंपा जाएगा।
कानून पूरी तरह स्पष्ट
एमबीबीएस चिकित्सक के अलावा कोई भी सोनोग्राफी का आदेश नहीं दे सकता
आरएमए, सीएचओ, आरएचओ केवल सिफारिश कर सकते हैं
एफ-फॉर्म का संधारण अनिवार्य है।
बिना वैध मेडिकल इंडिकेशन बार-बार सोनोग्राफी अपराध है
पीसी-पीएनडीटी एक्ट की धारा 23 के तहत दंड का प्रावधान है
प्रेस रिपोर्टर क्लब का अल्टीमेटम
प्रेस रिपोर्टर क्लब ने मांग की है कि—
सभी निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों के एफ-फॉर्म की तत्काल जांच कराई जाए
यह सार्वजनिक किया जाए कि सोनोग्राफी किसके आदेश पर लिखी गई
दोषी पाए जाने पर संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों और सेंटरों पर पीसी-पीएनडीटी एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई हो
जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए
कार्रवाई नहीं तो सड़क पर उतरेगा प्रेस रिपोर्टर क्लब
प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने दो टूक शब्दों में कहा—
“यदि आने वाले समय में CMHO कार्यालय ने इस मामले में ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की, तो प्रेस रिपोर्टर क्लब सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत दस्तावेज़ प्राप्त कर जन आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर शिकायत करने के लिए बाध्य होगा।
यह लड़ाई अब कागज़ तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सड़क तक जाएगी।