धान खरीदी अंतिम चरण में, उठाव की धीमी रफ्तार पर सवाल

प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने जताई चिंता, समितियों पर मंडरा रहा नुकसान का खतरा

रायपुर।छत्तीसगढ़ राज्य में धान खरीदी प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, लेकिन धान के उठाव की गति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रदेश के कई धान खरीदी केंद्रों और सेवा सहकारी समितियों में बड़ी मात्रा में धान खुले आसमान के नीचे रखे जाने की स्थिति सामने आ रही है, जिससे संभावित नुकसान की आशंका व्यक्त की जा रही है।

इस विषय को लेकर प्रेस रिपोर्टर क्लब, छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने राज्य सरकार और प्रशासन का ध्यान व्यवस्थागत चुनौतियों की ओर आकृष्ट करते हुए कहा है कि यदि समय रहते धान का उठाव नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर सेवा सहकारी समितियों और उनके कर्मचारियों पर पड़ सकता है।

“खुले में रखा धान जोखिम बढ़ा रहा है” — सोनी

प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने बयान जारी करते हुए कहा- “प्रदेश में किसानों का लगभग 80 से 90 प्रतिशत धान सेवा सहकारी समितियों तक पहुंच चुका है। कई स्थानों पर भंडारण की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण धान खुले में रखा गया है। यदि यह स्थिति बनी रहती है, तो नमी बढ़ने, वजन घटने और गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है।”

उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यदि भविष्य में धान की गुणवत्ता प्रभावित होती है, तो उसकी जिम्मेदारी समितियों और उनके कर्मचारियों पर आ सकती है, जबकि कई मामलों में कारण व्यवस्थागत और निर्णयात्मक होते हैं।

उठाव में देरी से बढ़ रही परेशानी

प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि मिलिंग और धान उठाव की प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण खरीदी केंद्रों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। खुले में रखे धान को न तो वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित किया जा पा रहा है और न ही उसे समय पर सुरक्षित गोदामों में स्थानांतरित किया जा रहा है।

प्रेस रिपोर्टर क्लब की मांग

प्रेस रिपोर्टर क्लब, छत्तीसगढ़ की ओर से शासन से यह मांग की गई है कि—

धान उठाव और मिलिंग प्रक्रिया में आवश्यक तेजी लाई जाए

खुले में रखे धान को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित भंडारण स्थलों तक पहुंचाया जाए

सेवा सहकारी समितियों के कर्मचारियों को संभावित दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण दिया जाए

“समय पर निर्णय नहीं हुआ तो नुकसान की आशंका”

प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने कहा—“यदि समय रहते आवश्यक और व्यावहारिक निर्णय नहीं लिए गए, तो यह स्थिति आगे चलकर संस्थाओं और कर्मचारियों दोनों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।”

हालांकि, इस पूरे मामले पर राज्य शासन या संबंधित विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।