
छत्तीसगढ़ के शहरी एवं ग्रामीण अंचलों में नापतोल विभाग की कार्यप्रणाली पूरी तरह संदेह के घेरे में आ चुकी है। जिस विभाग का काम जनता को सही वजन दिलाना है, वही विभाग आज ठेकेदारों और व्यापारियों के साथ मिलकर कम वजन की खुली छूट देता नजर आ रहा है।
सब्जी बाजार, किराना दुकान, फल मंडी, आइस फैक्ट्री सहित अनेक स्थानों पर बिना सत्यापन, बिना मानक और बिना नियमित निरीक्षण के सामान बेचा जा रहा है। आम उपभोक्ता को खरीदे गए सामान में 50 ग्राम, 100 ग्राम甚至 उससे अधिक की कटौती झेलनी पड़ रही है, जो सीधे-सीधे कानूनन अपराध है।
कानूनी दृष्टि से गंभीर अपराध
प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश संरक्षक दिलीप शुक्ला ने स्पष्ट कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि कानून का खुला उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि—
🔴 प्रमुख लागू कानूनी धाराएँ
विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 (Legal Metrology Act, 2009)
धारा 24: बिना सत्यापित वजन/माप उपकरण का उपयोग अपराध
धारा 25: गलत या छेड़छाड़ किए गए बाट-बांट का प्रयोग
धारा 36: उपभोक्ता को कम वजन देना दंडनीय अपराध
धारा 47: निरीक्षण न करने या लापरवाही पर विभागीय जिम्मेदारी
विधिक मापविज्ञान (प्रवर्तन) नियम, 2011
अनिवार्य है कि हर दुकान, फैक्ट्री एवं बाजार में प्रमाणित वजन उपकरण हो
निरीक्षक द्वारा नियमित जांच न करना नियमों का उल्लंघन है
भारतीय दंड संहिता (IPC)
धारा 420: धोखाधड़ी कर उपभोक्ता से धन वसूलना
धारा 409: लोक सेवक द्वारा विश्वासघात
धारा 120-B: ठेकेदार–अधिकारी की आपराधिक साजिश
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019
गलत वजन देना अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice)
उपभोक्ता को क्षतिपूर्ति और दंडात्मक कार्रवाई का अधिकार
प्रेस रिपोर्टर क्लब की सख्त चेतावनी
प्रदेश संरक्षक दिलीप शुक्ला ने आक्रामक लहजे में कहा—
“नापतोल निरीक्षक यदि आंख मूंदे बैठे हैं तो यह उनकी सीधी जिम्मेदारी है। अब केवल चेतावनी नहीं, बल्कि लिखित शिकायत, FIR और न्यायालयीन कार्रवाई होगी।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि
सभी जिलों के नापतोल निरीक्षक,
विभाग से जुड़े पंजीकृत ठेकेदार,
और संरक्षण देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों
के खिलाफ सामूहिक शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
अब चुप नहीं बैठेगा प्रेस रिपोर्टर क्लब
प्रेस रिपोर्टर क्लब छत्तीसगढ़ ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई जनहित, उपभोक्ता अधिकार और कानून के सम्मान की है।
यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो
जिला स्तर पर आंदोलन,
राज्य स्तर पर शिकायत,
और आवश्यकता पड़ी तो उच्च न्यायालय की शरण ली जाएगी।
जनता की मेहनत की कमाई लूटने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।
