
राजनांदगांव।जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को निजी डायग्नोस्टिक सेंटर की ओर अनावश्यक रूप से भेजे जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि आरएमए, सीएचओ एवं आरएचओ स्तर के कुछ स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा डायग्नोस्टिक सेंटर के एजेंटों के माध्यम से महिलाओं को सोनोग्राफी एवं अन्य जांचों के लिए भेजा जा रहा है, जिससे कमीशन आधारित गतिविधियों की आशंका उत्पन्न हो रही है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं उप स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत इन स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा बार-बार सोनोग्राफी व ब्लड टेस्ट लिखे जाने से ग्रामीण गर्भवती महिलाओं को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जबकि नियमानुसार ऐसी जांचों के लिए जिला अस्पताल अथवा मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जाना चाहिए।
कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन
छत्तीसगढ़ सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम / राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिनियम के तहत
एमबीबीएस चिकित्सक के अतिरिक्त किसी अन्य स्वास्थ्यकर्मी को सोनोग्राफी या जांच का आदेश देने का अधिकार नहीं है।
आरएमए, सीएचओ, आरएचओ केवल सिफारिश कर सकते हैं, जांच निर्देश नहीं दे सकते।
पीसी-पीएनडीटी एक्ट, 1994
धारा 3 एवं 4: सोनोग्राफी केवल पंजीकृत एवं अधिकृत केंद्रों में, निर्धारित चिकित्सकीय कारणों से ही की जा सकती है।
धारा 5: गर्भवती महिला की लिखित सहमति और वैध मेडिकल इंडिकेशन अनिवार्य है।
धारा 6: लिंग परीक्षण अथवा अनावश्यक सोनोग्राफी पूर्णतः प्रतिबंधित है।
धारा 23: अधिनियम का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति एवं संस्था पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
राष्ट्रीय मातृ स्वास्थ्य दिशानिर्देश (MoHFW)
सामान्य गर्भावस्था में सीमित व चिकित्सकीय आवश्यकता अनुसार ही सोनोग्राफी की अनुशंसा की गई है।
बार-बार सोनोग्राफी लिखना नियमों के विपरीत माना जाता है।
मातृ दिवस पर बढ़ती भीड़ और अनियमितता
प्रत्येक माह की 9 एवं 24 तारीख (मातृ दिवस) को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवती महिलाओं की भारी भीड़ रहती है। इसी दौरान कई मामलों में यह सामने आया है कि महिलाओं को तीन से चार बार, कुछ मामलों में चार से पांच बार, और कुछ मामलों में छह से सात बार तक सोनोग्राफी के लिए भेजा गया।
प्रेस रिपोर्टर क्लब की मांग
प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से मांग की है कि—
ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं से जाकर सर्वे कराया जाए
यह स्पष्ट किया जाए कि नियमानुसार कितनी बार सोनोग्राफी की अनुमति है
वास्तव में महिलाओं को कितनी बार सोनोग्राफी के लिए भेजा गया।
निजी डायग्नोस्टिक सेंटर को रेफर करने का आधार क्या था
उन्होंने कहा कि यदि मामले की शीघ्र जांच नहीं की गई, तो स्वास्थ्य अधिनियम एवं पीसी-पीएनडीटी एक्ट के अंतर्गत मुख्य चिकित्सा अधिकारी को लिखित शिकायत प्रस्तुत कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
