लिंगयाडीह आंदोलन 62वें दिन भी जारी, अल्पसंख्यक समाज व समाजसेवी संगठनों का खुला समर्थन, सरकार पर अनदेखी का आरोप

बिलासपुर।लिंगयाडीह क्षेत्र में जनसमस्याओं को लेकर चल रहा आंदोलन सोमवार को अपने 62वें दिन में प्रवेश कर गया। लंबे समय से जारी इस शांतिपूर्ण आंदोलन पर अब तक किसी भी प्रकार की ठोस सरकारी पहल न होने से आंदोलनकारियों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच आंदोलन को अल्पसंख्यक समाज एवं विभिन्न समाजसेवी संगठनों का खुला समर्थन मिलना शुरू हो गया है, जिससे आंदोलन को नई मजबूती मिलती दिख रही है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि वे अपनी जायज़ मांगों को लेकर लगातार शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। 62 दिनों से जारी इस आंदोलन में अब स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी भी बढ़ती जा रही है।

आंदोलन के समर्थन में सामने आए अल्पसंख्यक आयोग एवं समाजसेवी संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकार जनता की आवाज़ सुनने के बजाय आंखें मूंदे बैठी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही आंदोलनकारियों की मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक तथा उग्र रूप दिया जाएगा।

समाजसेवी संगठनों के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल लिंगयाडीह क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम जनता के अधिकारों और बुनियादी समस्याओं से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने सरकार से तत्काल आंदोलनकारियों से संवाद स्थापित कर समस्याओं का समाधान निकालने की मांग की, ताकि स्थिति और गंभीर न हो।

वहीं आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन अनवरत जारी रहेगा। लगातार मिल रहे समर्थन से आंदोलन को नई ताकत मिल रही है और आने वाले दिनों में इसके और तेज़ होने की संभावना जताई जा रही है।