
राजनांदगांव जिले एवं खैरागढ़–मानपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य अधिनियम एवं औषधि कानूनों से जुड़ा एक गंभीर और चिंताजनक विषय सामने आ रहा है। उपलब्ध जानकारियों एवं स्थानीय स्तर पर प्राप्त तथ्यों के आधार पर यह संकेतात्मक रूप से सामने आया है कि कुछ स्थानों पर अपंजीकृत/अप्रशिक्षित (झोलाछाप) चिकित्सकीय प्रैक्टिस करने वाले व्यक्तियों तक पर्ची-आधारित एवं संवेदनशील दवाइयों की आपूर्ति हो रही है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिन दवाइयों का उपयोग केवल पंजीकृत चिकित्सक की वैध पर्ची पर किया जाना चाहिए, उनमें
ऑप्टिमोक्स डीटी 250, ऑटोफ्लॉक्स 200, कोर्दिंन एलएस सिरप, मग्नाकाफ एलएस सिरप, मग्नाकाफ डी-एक्स सिरप, एक्स-जाइम सिरप, हेमो फोर्ट सिरप, डाई-कोल्ड टैब, वेनप्रेस ग्रुप टैब, ओमी कैप्सूल, डीएसआर ग्रुप तथा एंटीबायोटिक समूह की अन्य दवाइयाँ शामिल बताई जा रही हैं।
इन दवाइयों का बिना योग्य चिकित्सकीय परामर्श उपयोग मरीजों के स्वास्थ्य एवं जीवन के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है।
कानूनी स्थिति (स्वास्थ्य अधिनियम के अंतर्गत स्पष्टिकरण सहित)
यह समाचार स्वास्थ्य अधिनियम, जनहित एवं कानूनी जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया जा रहा है। इसका आशय किसी व्यक्ति, मेडिकल एजेंसी या प्रतिष्ठान पर प्रत्यक्ष आरोप लगाना नहीं, बल्कि सक्षम प्राधिकारियों का ध्यान तथ्यों की ओर आकर्षित करना है।
औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 18 के अनुसार बिना नियमों के दवाइयों का निर्माण, भंडारण, बिक्री अथवा वितरण दंडनीय अपराध है।
इसी अधिनियम की धारा 27 में उल्लंघन सिद्ध होने पर दंड एवं कारावास का प्रावधान है।
साथ ही औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियम, 1945 के तहत एंटीबायोटिक एवं अन्य पर्ची-आधारित दवाइयाँ केवल पंजीकृत चिकित्सक की लिखित पर्ची पर ही दी जा सकती हैं।
यदि लापरवाही से मरीज के जीवन को खतरा उत्पन्न होता है, तो आईपीसी की धारा 336/337/338 भी लागू हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एंटीबायोटिक का अनियंत्रित उपयोग एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) को बढ़ावा देता है, जिससे भविष्य में साधारण संक्रमण भी गंभीर एवं जानलेवा हो सकते हैं।
प्रशासनिक जांच की मांग
प्रेस रिपोर्टर क्लब से जुड़े पदाधिकारियों द्वारा जनहित में यह विषय सामने लाया गया है। संगठन की ओर से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) एवं ड्रग इंस्पेक्टर को लिखित निवेदन/शिकायत प्रस्तुत कर यह मांग की जाएगी कि—
संबंधित क्षेत्रों में स्वास्थ्य अधिनियम के तहत तथ्यात्मक जांच कराई जाए,
दवाइयों के स्टॉक, भंडारण एवं सप्लाई चैन का सत्यापन हो,
यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए,
तथा झोलाछाप चिकित्सकीय प्रैक्टिस तक दवाइयों की आपूर्ति पर तत्काल रोक लगाई जाए।
यह समाचार स्वास्थ्य अधिनियम के दायरे में सावधानीपूर्ण भाषा में, केवल जनस्वास्थ्य की सुरक्षा एवं कानून के पालन के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है, ताकि समय रहते संभावित खतरे को रोका जा सके और आम नागरिकों की जान सुरक्षित रह सके।
