स्वास्थ्य अधिनियम की खुलेआम धज्जियाँ ,छत्तीसगढ़ के निजी नर्सिंग होमों में मरीजों की जान जोखिम में

छत्तीसगढ़ राज्य में संचालित अनेक निजी नर्सिंग होम एवं अस्पतालों में स्वास्थ्य अधिनियम, नर्सिंग होम एक्ट और चिकित्सा मानकों की खुलेआम अनदेखी किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। यह महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़ा विषय प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी द्वारा उठाया गया है।
प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने राज्य के विभिन्न जिलों में निजी नर्सिंग होमों का दौरा, निरीक्षण एवं जमीनी पड़ताल की, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि नर्सिंग होम एमबीबीएस डॉक्टरों के नाम पर लाइसेंस तो प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन वास्तविक इलाज व्यवस्था में योग्य एमबीबीएस चिकित्सकों की अनिवार्य 24×7 तैनाती नहीं की जा रही है।
निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि—
बीएमएस (BMS), आयुष, होम्योपैथिक एवं सामान्य चिकित्सा जानकारी रखने वाले चिकित्सकों को आईसीयू, जनरल वार्ड एवं आपातकालीन सेवाओं में धड़ल्ले से तैनात किया गया है।
कई नर्सिंग होमों में एमबीबीएस डॉक्टर केवल कागजों में डायरेक्टर बनाकर दर्शाए गए हैं
वास्तविक उपचार, विशेषकर आईसीयू एवं गंभीर मरीजों की देखरेख, गैर-एमबीबीएस चिकित्सकों के भरोसे छोड़ी गई है।
मरीजों से भारी-भरकम शुल्क वसूला जा रहा है, जबकि नियमानुसार विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध नहीं कराया जा रहा
प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने इसे मरीजों के जीवन और स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ बताते हुए कहा कि आईसीयू जैसे संवेदनशील विभागों में अयोग्य चिकित्सकों की तैनाती घोर अपराध है और यह
छत्तीसगढ़ नर्सिंग होम अधिनियम, क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट अधिनियम एवं राज्य स्वास्थ्य अधिनियम का गंभीर उल्लंघन है।

प्रेस रिपोर्टर क्लब की सख्त चेतावनी

प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“स्वास्थ्य सेवा कोई व्यापार नहीं है।
मरीजों की जान के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नियमों का उल्लंघन जारी रहा तो
मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, जिला कलेक्टर, सीएमएचओ एवं नर्सिंग होम के नोडल अधिकारियों को
लिखित शिकायत, साक्ष्य एवं निरीक्षण रिपोर्ट सहित प्रतिवेदन सौंपा जाएगा,
साथ ही मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक खुलासा किया जाएगा।
प्रेस रिपोर्टर क्लब की मांग
प्रेस रिपोर्टर क्लब ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि—
सभी निजी नर्सिंग होमों की तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
जहाँ एमबीबीएस डॉक्टरों की वास्तविक 24×7 उपस्थिति नहीं है, वहाँ लाइसेंस तत्काल निरस्त किया जाए।आईसीयू में गैर-एमबीबीएस चिकित्सकों की तैनाती पाए जाने पर
स्वास्थ्य अधिनियम की दंडात्मक धाराओं के अंतर्गत कड़ी कार्रवाई हो।मरीजों के हित में मानक एवं सुरक्षित उपचार व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने कहा कि”मानव जीवन से बड़ा कोई व्यवसाय नहीं हो सकता,
और जो इसे व्यापार समझेंगे, उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई तय है।”