“तेल ही थाली की जान: असुरक्षित तेल से जनता रहे सावधान”

राजनांदगांव: शहर की गलियों में जो नाश्ता आज परोसा जा रहा है, वह केवल स्वाद का सवाल नहीं—यह स्वास्थ्य का बड़ा खतरा बन गया है। समोसा, आलू गुंडा, मिर्ची भजिया, चिकन पकौड़ा, चिली चिकन और चाउमिन—इन सबमें इस्तेमाल हो रहा है बार-बार उबाला गया काला, गाढ़ा और बदबूदार तेल, जो धीरे-धीरे हर परिवार की सेहत को प्रभावित कर रहा है। यह लापरवाही नहीं, यह निर्दयता है।

प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने चेतावनी दी:-
“यह शहर हमारे बच्चों का है, हमारे बुज़ुर्गों का है। किसी को भी यह अधिकार नहीं कि मुनाफ़े के लिए लोगों की जान से खेले। जो तेल कूड़े में फेंकने लायक है, वही जनता की थाली में डालना अपराध है—और यह रोज़ हो रहा है।”

संजय सोनी ने सवाल उठाया—कितने दिल के दौरे, कितनी बीमारियाँ, कितनी मासूम ज़िंदगियाँ—तब जाकर सिस्टम जागेगा?

खराब तेल से कैंसर, लीवर डैमेज और हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं।

बावजूद इसके निरीक्षण की कमी और लापरवाही जारी है।

फूड सेफ्टी और स्वास्थ्य विभाग से मांग-

  • खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत:
  • असुरक्षित तेल का उपयोग दंडनीय अपराध है।
  • सैंपल जांच, लाइसेंस रद्द और भारी जुर्माना सभी प्रावधान मौजूद हैं।

प्रेस रिपोर्टर क्लब ने चेतावनी दी है—यदि तुरंत:

  • सैंपल जांच नहीं हुई,
  • दोषियों पर सार्वजनिक और उदाहरणात्मक कार्रवाई नहीं हुई,
  • जनता को तेल की मानक जानकारी नहीं दी गई,
    तो संगठन खुद मैदान में उतरने के लिए तैयार है।
    यह लड़ाई किसी दुकानदार के नाम की नहीं—यह मां की रसोई, बच्चे की थाली और बुज़ुर्ग की सांस की लड़ाई है।

जनता से अपील:-

स्वाद के लिए अपनी सेहत कभी गिरवी मत रखिए।
आज सवाल पूछेंगे, तो कल स्वस्थ रहेंगे।

— प्रेस रिपोर्टर क्लब, प्रदेश अध्यक्ष: संजय सोनी