मां के संघर्ष को बनाया ताकत, फैशन की दुनिया में चार बहनों ने बढ़ाया परिवार का मान

रायपुर की सोनिया, सिमरन, चरणजीत और परविंदर कौर गुरया ने फैशन शो में दिखाई प्रतिभा; मां के आशीर्वाद और मार्गदर्शन को मानती हैं अपनी सबसे बड़ी ताकत

रायपुर। कहते हैं कि मां का संघर्ष बच्चों के जीवन की सबसे बड़ी सीख बन सकता है। जब बच्चों के मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो और मां का आशीर्वाद साथ हो, तो मुश्किल रास्ते भी आसान होने लगते हैं। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के भाटागांव में रहने वाली एक मां की चार बेटियां अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर फैशन की दुनिया में पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। सोनिया कौर गुरया, सिमरन कौर गुरया, चरणजीत कौर गुरया और परविंदर कौर गुरया पढ़ाई के साथ-साथ फैशन की दुनिया में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं।

मां के संघर्ष से मिली आगे बढ़ने की प्रेरणा

चारों बहनों के लिए उनकी मां केवल परिवार का सहारा ही नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी मार्गदर्शक भी हैं। बेटियों का कहना है कि उनकी मां ने जीवन में जिन कठिन परिस्थितियों और दुखों का सामना किया, उनसे उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला है। मां के संघर्ष को देखकर उन्होंने तय किया कि वे अपनी मेहनत से परिवार के जीवन में खुशियां लाएंगी और अपनी मां का नाम रोशन करेंगी।

चारों बहनों ने बताया कि आज वे जिस मुकाम की ओर आगे बढ़ रही हैं, उसमें उनकी मां के आशीर्वाद और मार्गदर्शन की अहम भूमिका है। उनका कहना है कि मां ने उन्हें हमेशा मेहनत करने, हिम्मत बनाए रखने और अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी है।

फैशन शो में दिखाया हुनर, हासिल किए खिताब

फैशन की दुनिया में अपनी प्रतिभा को मंच देने के लिए चारों बहनों को रायपुर में उम्मीद की किरण संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने कार्यक्रम में भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

इस आयोजन में सोनिया कौर गुरया ने किड्स कैटेगरी में थर्ड रनर-अप का खिताब हासिल किया, जबकि सिमरन कौर गुरया ने किड्स कैटेगरी में सेकंड रनर-अप का खिताब और क्राउन अपने नाम किया। इन उपलब्धियों ने चारों बहनों के उत्साह को बढ़ाया और फैशन की दुनिया में आगे बढ़ने के उनके संकल्प को मजबूती दी।

मां के दुखों को खुशियों में बदलने का संकल्प

चारों बहनों का कहना है कि वे अपनी मां के जीवन में आए दुखों को खुशियों में बदलना चाहती हैं। उनके अनुसार, उनकी मां ही उनकी सबसे बड़ी मार्गदर्शक हैं और उन्हीं से उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

बेटियों ने कहा कि वे अपनी मेहनत और लगन से आगे बढ़ना चाहती हैं, ताकि उनकी मां को उन पर गर्व हो। उन्होंने उम्मीद की किरण संस्था से जुड़ी उमा कुशवाहा के प्रति भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराया।

मेहनत, हौसले और मां के आशीर्वाद की कहानी

चारों बहनों की कहानी इस बात को रेखांकित करती है कि बच्चों की प्रतिभा को आगे बढ़ाने में परिवार का प्रोत्साहन और सही मार्गदर्शन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पढ़ाई के साथ अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ने का उनका प्रयास अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणादायक है।

सोनिया, सिमरन, चरणजीत और परविंदर कौर गुरया अपनी मां के संघर्ष को अपनी ताकत बनाकर आगे बढ़ रही हैं। उनके लिए सफलता केवल खिताब हासिल करना नहीं, बल्कि अपनी मां के सपनों को पूरा करना और उन्हें गर्व महसूस कराना भी है। मां के प्रति समर्पण, मेहनत और आत्मविश्वास से भरी इन चारों बहनों की कहानी संघर्ष के बीच उम्मीद और खुशियां तलाशने का संदेश देती है।