कुलदेवी मां महामाया के दरबार में गूंजेगा जोहार, सर्व आदिवासी समाज निकालेगा भव्य सेवा यात्रा

रतनपुर के बादल महल से महामाया मंदिर तक पारंपरिक बाजे-गाजे के साथ निकलेगी यात्रा, रूढ़ि-परंपराओं के संरक्षण और सामाजिक एकता का दिया जाएगा संदेश

रतनपुर, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की धर्मनगरी रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर में सर्व आदिवासी समाज रतनपुर इकाई द्वारा पारंपरिक जोहार सेवा यात्रा का आयोजन किया जाएगा। समाज की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक रीति-रिवाजों के संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित इस यात्रा में रतनपुर सहित बिलासपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों के शामिल होने की संभावना है।

समाज प्रमुखों के अनुसार, सर्व आदिवासी समाज मां महामाया दाई को अपनी कुलदेवी के रूप में मानता है और परंपरागत रूप से उनकी आराधना करता आया है। समाज के लिए मां महामाया का मंदिर आस्था, शक्ति और उपासना का प्रमुख केंद्र रहा है।

परंपराओं के संरक्षण के उद्देश्य से आयोजन

आयोजकों के अनुसार, ऐतिहासिक रूप से रतनपुर स्थित महामाया मंदिर में पूजा-अर्चना और सेवा संबंधी व्यवस्थाओं में स्थानीय आदिवासी समाज के बैगा-भूमका की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समाज की पारंपरिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों के अनुसार कुलदेवी की सेवा, अर्जी और पूजन की परंपरा प्रचलित रही है।

समाज प्रमुखों का कहना है कि समय के साथ इन पारंपरिक व्यवस्थाओं से समाज की दूरी बढ़ी है। ऐसे में अपनी सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक मान्यताओं और रूढ़ि-परंपराओं को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से जोहार सेवा यात्रा आयोजित की जा रही है।

बादल महल से महामाया मंदिर तक निकलेगी यात्रा

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आगामी नवरात्रि की पंचमी तिथि, गुरुवार को रतनपुर के जूना शहर स्थित बादल महल से मां महामाया मंदिर प्रांगण तक पारंपरिक बाजे-गाजे के साथ जोहार सेवा यात्रा निकाली जाएगी।

यात्रा के दौरान समाज के सदस्य अपनी पारंपरिक रीति-परंपराओं के अनुसार मां महामाया दाई को चुनरी अर्पित करेंगे, सेवा-अर्जी प्रस्तुत करेंगे और भोग अर्पित कर पूजा-अर्चना करेंगे। आयोजकों का उद्देश्य इस आयोजन के माध्यम से सामाजिक एकजुटता को मजबूत करना तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है।

जिलेभर से समाज के लोगों के शामिल होने की उम्मीद

इस आयोजन में रतनपुर सहित बिलासपुर जिले के विभिन्न ब्लॉकों और क्षेत्रों से सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजकों के अनुसार, यात्रा में बड़ी संख्या में समाज के लोग भाग लेकर अपनी आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करेंगे।

कार्यक्रम के संबंध में जिला कलेक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर को सूचनार्थ आवेदन भी प्रेषित किया गया है।

सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान पर जोर

सर्व आदिवासी समाज रतनपुर इकाई द्वारा आयोजित यह जोहार सेवा यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाज की सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामाजिक एकता को केंद्र में रखती है। आयोजकों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से समाज की परंपराओं को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।