बालोद में पशु व्यापारियों का फूटा गुस्सा, अवैध वसूली और उत्पीड़न के खिलाफ प्रशासन से लगाई गुहार

बालोद | बालोद जिले के पशु व्यापारियों ने एकजुट होकर अपनी गंभीर समस्याओं को लेकर जिला प्रशासन के समक्ष गुहार लगाई है। व्यापारियों ने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को संबोधित एक विस्तृत आवेदन सौंपते हुए अवैध वसूली, मारपीट, झूठे मामलों में फंसाने की धमकी और पशुओं के साथ अमानवीय व्यवहार जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
व्यापारियों का कहना है कि वे वर्षों से परंपरागत रूप से पशुओं की खरीदी-बिक्री का कार्य करते आ रहे हैं। यह व्यवसाय न केवल उनके परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन है, बल्कि किसानों और पशुपालकों की आर्थिक व्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में लगातार हो रही कथित प्रताड़ना ने उन्हें गहरी चिंता में डाल दिया है।
आवेदन में व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग स्वयं को गौ सेवा आयोग, गौ रक्षा समिति या अन्य संगठनों से जुड़ा बताकर रास्तों में उन्हें रोकते हैं, अवैध रूप से पैसों की मांग करते हैं और विरोध करने पर मारपीट तथा झूठे प्रकरण में फंसाने की धमकी देते हैं। व्यापारियों ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से उनके बीच भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।
व्यापारियों ने 29 मार्च 2026 की एक घटना का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार ग्राम बेलमांड के नहर-नाली क्षेत्र में उन्हें रोककर पैसों की मांग की गई। जब पैसे नहीं दिए गए, तो उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई करवाई गई, जबकि उनके पास सभी आवश्यक और वैध दस्तावेज मौजूद थे। व्यापारियों का यह भी आरोप है कि उनके पशुओं को जब्त कर नगर पालिका बालोद की गौशाला में रख दिया गया, जहां पर्याप्त चारा-पानी और देखभाल की व्यवस्था नहीं होने से पशुओं की हालत बिगड़ रही है।
इस आवेदन में चंद्रलाल साहू, गुलाबचंद साहू, दुकेश कुमार सिन्हा, कैलाश राम सिन्हा, ओमप्रकाश साहू, धनराज, प्रेमचंद, तेजराम, मनोज कुमार, जयकुमार, प्रकाश कुमार, डोमनलाल, उमेश कुमार, दिनेश कुमार, अशोक कुमार, रमेश साहू, संतोष Kumar, महेंद्र कुमार, देवेंद्र कुमार सहित 20 से अधिक पशु व्यापारियों के नाम शामिल हैं।
व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, झूठे मामलों की निष्पक्ष जांच हो, जब्त किए गए पशुओं को तत्काल वापस किया जाए और व्यापारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ठोस व्यवस्था बनाने की भी मांग की गई है।
बालोद जिले में पशु व्यापारियों द्वारा उठाया गया यह मामला अब गंभीर होता जा रहा है। यदि समय रहते इस पर निष्पक्ष और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका असर न केवल पशु व्यापारियों पर बल्कि किसानों और पूरे कृषि तंत्र पर भी पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।