राजनांदगांव क्षेत्र में प्रतिबंधित लकड़ियों की अवैध सप्लाई और जीएसटी चोरी का खेल, प्रेस रिपोर्टर क्लब ने उठाई कार्रवाई की मांग

राजनांदगांव क्षेत्र में इन दिनों लकड़ी ठेकेदारों द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध लकड़ी सप्लाई का मामला सामने आ रहा है। जानकारी के अनुसार कई ठेकेदार सैकड़ों फैक्ट्रियों में धड़ल्ले से लकड़ी की सप्लाई कर रहे हैं, जिसमें बंबुल, रिया, कौवा, आम, इमली, बीजा और अन्य फलदार तथा प्रतिबंधित वृक्षों की लकड़ियां भी शामिल बताई जा रही हैं।
बताया जा रहा है कि इन लकड़ियों को बिना किसी वैध अनुमति और दस्तावेज के बड़े स्तर पर फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जा रहा है। कई स्थानों पर बिना इनवॉइस और बिना जीएसटी नंबर के ही लकड़ी की सप्लाई की जा रही है, जिसे बाद में ईंधन या अन्य औद्योगिक उपयोग में खपाया जा रहा है। इससे शासन के राजस्व को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार कई आरा मिलों और फैक्ट्रियों में इस प्रकार की लकड़ियों का उपयोग किया जा रहा है, जहां बिल और जीएसटी के बिना खरीद–फरोख्त कर सरकारी कर (GST) की खुली चोरी की जा रही है। इसके बावजूद संबंधित विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि राजनांदगांव और आसपास के क्षेत्रों में लकड़ी ठेकेदारों और कुछ फैक्ट्री मालिकों द्वारा प्रतिबंधित वृक्षों की कटाई और अवैध सप्लाई का संगठित नेटवर्क चलाया जा रहा है। यदि यह सही पाया जाता है तो यह न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है बल्कि शासन के राजस्व की भी खुली चोरी है।
उन्होंने कहा कि कई ठेकेदार बिना इनवॉइस और बिना जीएसटी बिल के लकड़ी की सप्लाई कर रहे हैं, जिससे करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हो सकती है। ऐसे मामलों में आयकर विभाग, जीएसटी विभाग और वन विभाग को तत्काल संयुक्त जांच करनी चाहिए।
संजय सोनी ने मांग की है कि जिन ठेकेदारों और फैक्ट्रियों द्वारा बिना जीएसटी बिल के लकड़ी की खरीद–फरोख्त की जा रही है, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई कर बकाया जीएसटी वसूल किया जाए। साथ ही जिन फैक्ट्रियों में बड़ी मात्रा में लकड़ी की खपत हो रही है, वहां जांच कर यह पता लगाया जाए कि लकड़ी किस स्रोत से लाई गई और उसका वैध बिल व जीएसटी भुगतान हुआ है या नहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई ठेकेदार या फैक्ट्री मालिक जीएसटी नियमों का पालन नहीं करता है तो उनके ऊपर कठोर दंडात्मक कार्रवाई, भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रेस रिपोर्टर क्लब ने चेतावनी दी है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती है तो आने वाले समय में दस्तावेजों के साथ इस मुद्दे को उच्च स्तर तक उठाया जाएगा, ताकि शासन के राजस्व और पर्यावरण की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।