

नेवारीकला में इस वर्ष होली का पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों, सामाजिक एकता और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के पालन के साथ अत्यंत धूमधाम से मनाया गया। पूरे गांव में कई दिनों पहले से ही त्योहार को लेकर उत्साह का माहौल बना हुआ था। ग्रामीणों ने मिलकर साफ-सफाई अभियान चलाया, सार्वजनिक स्थानों को सजाया और होलिका दहन स्थल को व्यवस्थित रूप दिया।
होलिका दहन के अवसर पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। महिलाओं ने मंगल गीत गाए और परिवार की सुख-समृद्धि एवं गांव की उन्नति की कामना की। बुजुर्गों ने बच्चों को होली के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी। इस अवसर पर ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे।
रंगोत्सव के दिन सुबह से ही गांव की गलियां रंगों से सराबोर नजर आईं। बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। छोटे-छोटे बच्चे पिचकारियों और गुलाल के साथ खुशी से झूमते नजर आए। युवाओं ने भी संयम और मर्यादा के साथ होली खेली तथा किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो इसका विशेष ध्यान रखा। ग्रामीणों ने प्राकृतिक रंगों के उपयोग और पानी की बचत का संदेश भी दिया।
त्योहार के दौरान सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए ग्राम स्तर पर स्वयंसेवकों की टीम सक्रिय रही। प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया गया, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कहीं से भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
इस अवसर पर गांव में सामूहिक मिलन समारोह का आयोजन भी किया गया, जहां लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दीं। मिठाइयों का वितरण किया गया और पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया गया। महिलाओं और युवतियों ने लोकगीतों पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत कर माहौल को और भी रंगीन बना दिया।
ग्रामवासियों ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता का प्रतीक है। नेवारीकला में इस वर्ष की होली ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि नियमों का पालन करते हुए भी त्योहार को पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा सकता है।
