
बालोद। जिले में उप पंजीयक (उप रजिस्ट्रार) कार्यालय द्वारा जमीन का निर्धारित बाजार भाव (गाइडलाइन दर) उपलब्ध नहीं कराए जाने से किसानों एवं आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जमीन की खरीदी-बिक्री से जुड़े कार्यों में देरी होने के कारण लोगों को आर्थिक एवं मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, जमीन पंजीयन के समय सही बाजार मूल्य स्पष्ट नहीं होने से दस्तावेज तैयार करने में कठिनाई हो रही है। कई मामलों में दस्तावेज लेखकों को बार-बार संशोधन करना पड़ रहा है, जिससे उनका समय और श्रम दोनों व्यर्थ हो रहा है। दस्तावेज लेखकों का कहना है कि यदि समय पर गाइडलाइन दर उपलब्ध कराई जाए तो पंजीयन प्रक्रिया सरल और पारदर्शी हो सकती है।
किसानों का आरोप है कि जमीन का वास्तविक बाजार भाव नहीं मिलने से उन्हें अपनी जमीन का उचित मूल्य तय करने में दिक्कत आ रही है। कई लोग रजिस्ट्री के लिए कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अतिरिक्त खर्च और असुविधा झेलनी पड़ रही है।
स्थानीय नागरिकों एवं दस्तावेज लेखकों ने प्रशासन से मांग की है कि बाजार मूल्य से संबंधित जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए तथा ऑनलाइन माध्यम से भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि आम लोगों को बार-बार कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।
इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, किंतु समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका
