मेडिकल एजेंसी द्वारा बिना मान्यता प्राप्त डिग्री वाले चिकित्सकों को प्रतिबंधित दवाइयों की सप्लाईड्रग एवं स्वास्थ्य अधिनियम का गंभीर उल्लंघन, जनस्वास्थ्य से सीधा खिलवाड़

राजनांदगांव।जिले के ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में दवा वितरण प्रणाली को लेकर एक बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति सामने आई है। जानकारी के अनुसार कुछ मेडिकल एजेंसियाँ अपने ड्रग लाइसेंस की आड़ में ऐसी दवाइयों की सप्लाई कर रही हैं, जो कानूनन केवल पंजीकृत एवं मान्यता प्राप्त चिकित्सकों के उपयोग के लिए निर्धारित हैं। यह सप्लाई बिना मान्यता प्राप्त डिग्री वाले चिकित्सकों तक पहुँच रही है, जिनमें हाई-पावर एंटीबायोटिक, इंजेक्शन एवं प्रतिबंधित श्रेणी की दवाइयाँ शामिल बताई जा रही हैं।
यह पूरा मामला ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम के प्रावधानों का खुला और सुनियोजित उल्लंघन माना जा रहा है।
💊 कानून से बाहर जा रही दवा सप्लाई-
सूत्रों के अनुसार—
दवाइयाँ बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन सप्लाई की जा रही हैं
बिक्री का उचित रिकॉर्ड और ट्रेसिंग सिस्टम नहीं है।
प्रतिबंधित दवाइयों का उपयोग अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी दवाइयों का गलत उपयोग—
एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस को बढ़ावा देता है।
इलाज को जटिल और खतरनाक बनाता है।
आम नागरिकों की जान को जोखिम में डालता है।
🗣️ मैदान से सामने आए तथ्य
प्रेस रिपोर्टर क्लब की टीम द्वारा की गई पड़ताल और चर्चा में
कई निजी प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों ने नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया कि—
“कुछ मेडिकल एजेंसियाँ ऐसी दवाइयाँ सप्लाई कर रही हैं
जिनका उपयोग केवल विशेषज्ञ और पंजीकृत डॉक्टरों को करना चाहिए।
इन दवाइयों के साथ न तो उचित मार्गदर्शन होता है
और न ही पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन।”
❓ सबसे बड़ा सवाल — जिम्मेदारी किसकी?
इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या मेडिकल एजेंसियाँ ड्रग लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन कर रही हैं?
क्या दवा सप्लाई से पहले चिकित्सक की वैधता की जाँच की जा रही है?
क्या ड्रग निरीक्षण व्यवस्था पर्याप्त और सक्रिय है?
क्योंकि ड्रग लाइसेंस का उद्देश्य सुरक्षित दवा वितरण है,
न कि अनधिकृत चिकित्सा को बढ़ावा देना।
⚖️ ड्रग एवं स्वास्थ्य अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई का प्रावधान
📜 ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940
यदि मेडिकल एजेंसी द्वारा—
प्रतिबंधित दवाइयों की अवैध सप्लाई-
बिना मान्यता प्राप्त डिग्री वाले चिकित्सकों को दवा वितरण
ड्रग लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन
किया जाता है, तो—
ड्रग लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण
दवा स्टॉक की जब्ती
भारी जुर्माना एवं कारावास
जैसी कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान है।
🏥 सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम
जनस्वास्थ्य को खतरे में डालने वाली गतिविधियाँ
अवैध चिकित्सा को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा
➡️ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने का अधिकार
➡️ प्रतिष्ठान सील किए जाने का प्रावधान
🗣️ प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी की स्पष्ट और संतुलित मांग
प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने
ड्रग एवं स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि—
“इस मुद्दे को उठाने का उद्देश्य किसी मेडिकल एजेंसी को बदनाम करना नहीं है।
मांग केवल इतनी है कि ड्रग लाइसेंस के नियमों का सख्ती से पालन हो।
जो एजेंसियाँ नियमों के अनुसार कार्य कर रही हैं,उन्हें किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
लेकिन जो एजेंसियाँ बिना मान्यता प्राप्त डिग्री वाले चिकित्सकों को प्रतिबंधित दवाइयाँ सप्लाई कर रही हैं,
उन्हें तत्काल चिन्हित कर कड़ी कार्रवाई की जाए,ताकि जनता का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।”
🔍 तथ्यों और दस्तावेज़ों के साथ होगा खुलासा
प्रेस रिपोर्टर क्लब ने बताया कि—
दवाइयों के बैच नंबर
सप्लाई से जुड़े दस्तावेज़
संबंधित व्यक्तियों के लिखित बयान
👉 सत्यापन के बाद ड्रग कंट्रोल और स्वास्थ्य विभाग के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे,
ताकि कार्रवाई निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनसम्मत हो।
✍️ आक्रामक लेकिन जिम्मेदार पंक्तियाँ
ड्रग लाइसेंस अगर ढाल बन जाए,
और दवा नियम से बाहर जाए,
तो सवाल सिर्फ़ कानून का नहीं,
सीधे इंसान की जान का बन जाता है।