
राजनांदगांव सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों डायग्नोस्टिक सेंटरों का एक बड़ा “कमीशन नेटवर्क” तेजी से फैलता नजर आ रहा है। आरोप है कि यहां स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर खुला खेल खेला जा रहा है, जहां नियम-कानून को ताक पर रखकर सिर्फ पैसे कमाने का धंधा चल रहा है।
सूत्रों के अनुसार, ग्रामीण चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मचारी और यहां तक कि मितानिन तक बिना किसी स्पष्ट आवश्यकता के मरीजों को धड़ल्ले से सोनोग्राफी लिख रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि डायग्नोस्टिक सेंटर भी बिना किसी वैध जांच या नियमों की पुष्टि के, हर पर्ची पर सोनोग्राफी कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या अब जांच की जरूरत मरीज तय करता है या कमीशन?
बताया जा रहा है कि इन सेंटरों के एजेंट गांव-गांव घूमकर मितानिन, ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और निजी चिकित्सकों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। मोटे कमीशन का लालच देकर अधिक से अधिक मरीज भेजने का दबाव बनाया जा रहा है। परिणामस्वरूप, जरूरत न होने पर भी गरीब और भोली-भाली जनता को महंगी जांचों में उलझाया जा रहा है।
इस पूरे खेल में सबसे ज्यादा नुकसान उस आम ग्रामीण व्यक्ति को हो रहा है, जो पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। इलाज के नाम पर उसकी जेब खाली की जा रही है, जबकि डायग्नोस्टिक सेंटर दिन-दूनी रात-चौगुनी कमाई कर रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर उठ रहा है। आखिरकार इतने बड़े स्तर पर हो रहे इस खेल पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे नेटवर्क से अनजान हैं या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं?
👉 प्रेस रिपोर्टर क्लब, प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी का सीधा सवाल:
“जनता के स्वास्थ्य के साथ हो रहा यह खुला खिलवाड़ आखिर कब तक चलता रहेगा? स्वास्थ्य विभाग कब जागेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई कब होगी?”
अब जरूरत है कि प्रशासन तुरंत ऐसे डायग्नोस्टिक सेंटरों और संबंधित लोगों की पहचान कर सख्त जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर चल रही इस लूट पर लगाम लग सके। अन्यथा आने वाले समय में इस मामले को लेकर औपचारिक शिकायत और जनआंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।
