राजनांदगांव में अवैध वृक्ष कटाई का खुला खेल, ठेकेदारों का आतंक — वन अमले की गश्त सवालों के घेरे में

राजनांदगांव।जिले के ग्रामीण अंचलों में अवैध वृक्ष कटाई का धंधा खुलेआम जारी है। ठेकेदारों द्वारा किसानों को कम दाम का लालच देकर सभी प्रजातियों के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कराई जा रही है और इस लकड़ी को बिना किसी भय के बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में ईंधन के नाम पर डंप किया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में वन विभाग की गश्त अत्यंत कमजोर होने के कारण ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं। हालात ऐसे हैं कि बिना किसी डर के हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं, जबकि संबंधित रेंज के रेंजर नियमों के अनुरूप गश्त सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल नजर आ रहे हैं। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या इन ठेकेदारों को अघोषित संरक्षण दिया जा रहा है?
कटाई की जद में केवल सामान्य वृक्ष ही नहीं, बल्कि आम, इमली, जामुन जैसे फलदार वृक्ष, वर्षों पुराने छायादार पेड़ तथा पक्षियों का आश्रय बने वृक्ष भी बेरहमी से काटे जा रहे हैं। इससे पर्यावरण संतुलन, जैव विविधता और ग्रामीण जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष ने वन विभाग से कड़ी मांग करते हुए कहा है कि
“यदि वन अमला तत्काल प्रभाव से गश्त नहीं बढ़ाता और अवैध लकड़ी कटाई पर रोक नहीं लगाता, तो आने वाले समय में प्रेस रिपोर्टर क्लब स्वयं ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर जमीनी खुलासे करेगा।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि क्लब का उद्देश्य किसी विभाग पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों को बचाना है। लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण ही ठेकेदारों का दुस्साहस बढ़ता जा रहा है।
आज यदि जिले की उन फैक्ट्रियों की जांच की जाए, जहां ईंधन के नाम पर लकड़ी का उपयोग हो रहा है, तो यह साफ हो जाएगा कि राजनांदगांव के हजारों पेड़ उन भट्टियों में झोंके जा रहे हैं।
प्रेस रिपोर्टर क्लब ने यह भी कहा कि “पेड़ बचाओ, पेड़ लगाओ”, “एक पेड़ माँ के नाम” जैसे केंद्र और राज्य सरकार के अभियान को ठेकेदार और आरा-मिल संचालक खुलेआम मजाक बनाकर रखे हुए हैं।
क्लब ने वन विभाग से मांग की है कि
अवैध कटाई पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए
ठेकेदारों, आरा-मिलों और फैक्ट्रियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए
नियमित और पारदर्शी वन गश्त प्रणाली लागू की जाए
अन्यथा, आने वाले दिनों में यह मामला जनआंदोलन का रूप ले सकता है।