
राजनांदगांव/छत्तीसगढ़।शिक्षा विभाग में फॉर्म 16 के नाम पर वकीलों को किए जा रहे भुगतान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपलों द्वारा इस प्रकार के भुगतान किए जाने की बात सामने आई है, जो नियमों और प्रक्रियाओं पर सवाल खड़ा करती है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर किस नियम और किस अधिकार के तहत वकीलों को फॉर्म 16 के नाम पर भुगतान किया जा रहा है। यदि यह भुगतान वैध है, तो इसके स्पष्ट नियम और प्रावधान क्या हैं, और यदि नहीं, तो यह सीधा-सीधा वित्तीय अनियमितता और शासन की राशि के दुरुपयोग का मामला बनता है।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल एक व्यक्ति या एक बार के भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें लगातार भुगतान किए जाने की आशंका जताई जा रही है। इससे यह भी सवाल उठता है कि क्या संबंधित अधिकारी जानबूझकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, या फिर यह पूरा मामला मिलीभगत और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
हैरानी की बात यह है कि पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद शिक्षा विभाग अब तक मौन बना हुआ है। इससे जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ रही है।
यह मामला केवल एक विभागीय त्रुटि नहीं, बल्कि जनता के टैक्स के पैसे के दुरुपयोग का गंभीर मुद्दा है। ऐसे में इसकी निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है।
🗣️ प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने उठाए सवाल:
प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि—
“फॉर्म 16 के नाम पर हो रहे इस तरह के भुगतान की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
आखिर यह खेल कब तक चलता रहेगा?
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
और जनता के पैसे का पूरा हिसाब कौन देगा?”
📢 निष्कर्ष:
अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन और प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब संज्ञान लेते हैं और क्या दोषियों पर ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।
