
राजनांदगांव।शहर में पेस्ट्री, क्रीम रोल, नानखटाई जैसे बेकरी उत्पादों की बिक्री आज आम बात हो चुकी है। सुबह से लेकर देर रात तक ये उत्पाद शहर की कई प्रतिष्ठित दुकानों में खुलेआम बेचे जा रहे हैं। लेकिन चौंकाने वाली सच्चाई यह है कि इन खाद्य पदार्थों पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2006 के अनिवार्य प्रावधानों का पालन होता कहीं नजर नहीं आता। अधिकांश बेकरी उत्पादों पर ना तो Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) का लाइसेंस नंबर अंकित है, ना ही निर्माण तिथि, उपयोग की अंतिम तिथि, सामग्री सूची या अन्य आवश्यक विवरण, जो सीधे-सीधे कानून का उल्लंघन है।
खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 26 स्पष्ट रूप से कहती है कि सुरक्षित, मानक और कानून के अनुरूप खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना खाद्य व्यवसायी की जिम्मेदारी है। वहीं धारा 31 के अनुसार बिना वैध FSSAI लाइसेंस के खाद्य पदार्थों का निर्माण और विक्रय गैरकानूनी है। इसके बावजूद शहर में बिना लेबल, बिना तारीख और बिना वैधानिक जानकारी के पेस्ट्री व अन्य बेकरी उत्पादों की बिक्री यह सवाल खड़ा करती है कि नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं क्या?
नियमों के अनुसार किसी भी बेकरी उत्पाद पर निर्माता का नाम-पता, 14 अंकों का FSSAI लाइसेंस नंबर, निर्माण तिथि, Use By / Best Before तिथि, सामग्री सूची (Ingredients), Veg/Non-Veg चिन्ह, एलर्जन चेतावनी और स्टोरेज निर्देश अनिवार्य रूप से अंकित होना चाहिए। इन जानकारियों का अभाव न केवल धारा 50 और 52 के तहत दंडनीय अपराध है, बल्कि यह सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि खराब क्रीम, सिंथेटिक रंग और अस्वच्छ परिस्थितियों में बने उत्पाद बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए घातक साबित हो सकते हैं।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि शासन-प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की चुप्पी इस पूरे मामले को और संदेहास्पद बना रही है। जब कानून स्पष्ट है और उल्लंघन खुलेआम दिखाई दे रहा है, तो अब तक जांच अभियान, सैंपलिंग और दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? यह स्थिति निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है।
इस मामले को लेकर प्रेस रिपोर्टर क्लब, प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में वे स्वयं पेस्ट्री, क्रीम रोल और अन्य बेकरी उत्पादों के सैंपल (टेस्टी) एकत्र कर फूड सेफ्टी विभाग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। शिकायत के साथ प्रयोगशाला जांच की मांग की जाएगी, ताकि दूध, क्रीम, रंग-रसायन, स्वच्छता और एक्सपायरी से जुड़ी वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
शहरवासियों और उपभोक्ताओं की भी यह मांग है कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत तत्काल सघन जांच अभियान चलाया जाए, संदिग्ध बेकरी उत्पादों के नमूने जब्त कर परीक्षण कराया जाए और नियमों की अनदेखी करने वालों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सवाल साफ है—क्या जनता की सेहत से बड़ा कुछ नहीं, या फिर नियमों की अनदेखी यूं ही चलती रहेगी?
