लिंगयाडीह आंदोलन 67वें दिन भी जारी, मानवाधिकार सहायता संस्थान भारत का समर्थन

रोजगार, आवास और शिक्षा का अधिकार प्रभावित — प्रशासन से मानवीय समाधान की मांग

बिलासपुर।लिंगयाडीह क्षेत्र में नागरिकों की बुनियादी जनसमस्याओं को लेकर चल रहा शांतिपूर्ण आंदोलन सोमवार को अपने 67वें दिन में प्रवेश कर गया। लंबे समय से जारी इस आंदोलन के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस, संवेदनशील एवं भरोसेमंद पहल न होने से आंदोलनकारियों में असंतोष और पीड़ा लगातार बढ़ती जा रही है।

आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए मानवाधिकार सहायता संस्थान भारत के प्रदेश एवं जिला पदाधिकारियों ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर पीड़ित नागरिकों से प्रत्यक्ष संवाद किया और उनकी समस्याओं की विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त की। नागरिकों ने बताया कि पुनर्वास के नाम पर जिस स्थान पर आवास दिया जा रहा है, वहां बुनियादी सुविधाओं, आजीविका के साधनों एवं सामाजिक परिवेश का घोर अभाव है, जो उनके जीवनयापन के अनुकूल नहीं है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि लिंगयाडीह से उनका रोजगार प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। यदि उन्हें इस क्षेत्र से विस्थापित किया गया, तो उनका आजीविका का अधिकार छिन जाएगा, जिससे वे गंभीर आर्थिक संकट में आ जाएंगे। यह स्थिति संविधान प्रदत्त जीवन और सम्मानपूर्वक जीविका के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।

इसके साथ ही नागरिकों ने बच्चों की शिक्षा को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की। वर्षों से इसी क्षेत्र एवं आसपास के शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत बच्चों की पढ़ाई विस्थापन के कारण प्रभावित होगी, जिससे उनके भविष्य पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि आवास का विकल्प दिया जाना पर्याप्त नहीं है, जब तक रोजगार, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित न की जाए।

मानवाधिकार सहायता संस्थान भारत ने इस आंदोलन को मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए कहा कि किसी भी विकास कार्य में नागरिकों के रोजगार के अधिकार, शिक्षा के अधिकार, आवास के अधिकार और सम्मानजनक जीवन के अधिकार की अनदेखी नहीं की जा सकती। संस्थान ने स्पष्ट रूप से आंदोलनकारियों की मांगों का समर्थन करते हुए प्रशासन से अपील की है कि विकास और कानून के साथ-साथ मानवता और संवैधानिक मूल्यों को भी प्राथमिकता दी जाए।

संस्थान ने प्रशासन से मांग की कि लिंगयाडीह क्षेत्र से हो रहे विस्थापन की प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए और आंदोलनकारियों को विश्वास में लेकर ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे न तो उनका रोजगार छीने, न बच्चों का भविष्य प्रभावित हो और न ही मानवीय अधिकारों का हनन हो।

मानवाधिकार सहायता संस्थान भारत ने यह भी कहा कि बिना समुचित पुनर्वास, आजीविका की गारंटी और शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित किए किसी भी प्रकार का विस्थापन मानवाधिकारों के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है। प्रशासन से अपेक्षा की गई कि वह संवेदनशीलता दिखाते हुए जनहित में ठोस, न्यायसंगत और मानवीय पहल करे, ताकि नागरिकों का विश्वास बना रहे और सामाजिक संतुलन कायम रह सके।

मानवाधिकार सहायता संस्थान भारत से गौतम बालबोंदरे राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी, डॉक्टर रमेश वैष्णव प्रदेश अध्यक्ष चिकित्सा प्रकोष्ठ, डॉक्टर प्रीतम पटेल प्रदेश उपाध्यक्ष चिकित्सा प्रकोष्ठ ,गोपालु पटेल जिला अध्यक्ष, विजय कुमार प्रजापति जिला संगठन मंत्री, सोनवानी जिला चेयर मैन,धर्मेश बंजारे जिला सचिव ,सुरेंद्र कैवर्त जिला उपाध्यक्ष, सत्येंद्र प्रजापति ब्लॉक अध्यक्ष, अजय साहू, श्याम गेंदले, आनंद राव उपस्थित रहे।