
बालोद।जिला बालोद में हड्डी रोग विशेषज्ञ के नाम की आड़ में झोलाछाप व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से इलाज किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यह व्यक्ति स्वयं को राजनांदगांव के एक प्रतिष्ठित हड्डी रोग विशेषज्ञ से जुड़ा बताकर बालोद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में क्लीनिक संचालित कर रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त व्यक्ति बालोद जिले में बैठकर इलाज करता है, लेकिन उसके पास बालोद एवं राजनांदगांव जिले के शहरी व ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। दो जिलों की सीमा से लगे क्षेत्रों का लाभ उठाकर वह मरीजों को बड़े डॉक्टर के नाम पर भरोसे में ले रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह झोलाछाप व्यक्ति विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं को लकवा, साइटिका, कमर दर्द, नसों की कमजोरी एवं हड्डी संबंधी बीमारियों के नाम पर नसों और हड्डियों में अज्ञात इंजेक्शन लगाता है। इन इंजेक्शनों की कोई वैधानिक अनुमति या चिकित्सकीय प्रमाण सामने नहीं है, इसके बावजूद मरीजों से भारी-भरकम रकम वसूली की जा रही है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि क्लीनिक में राजनांदगांव के एक प्रतिष्ठित हड्डी रोग विशेषज्ञ का नाम व बोर्ड लगाया गया है, जिससे आमजन यह समझते हैं कि इलाज किसी मान्यता प्राप्त डॉक्टर द्वारा किया जा रहा है। इसी भ्रम के कारण गरीब और अशिक्षित ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। आरोप है कि उक्त व्यक्ति द्वारा एक्स-रे, सोनोग्राफी एवं अन्य पैथोलॉजी जांचों की भी सलाह दी जाती है, जो छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य अधिनियम, क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट एवं पीसीपीएनडीटी एक्ट (PC & PNDT Act) का सीधा उल्लंघन है।
इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष श्री संजय सोनी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। इसे रोकने के लिए प्रेस रिपोर्टर क्लब द्वारा ग्रामीण स्तर पर सर्वे कर साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं।
प्रेस रिपोर्टर क्लब की टीम मरीजों के बयान, क्लीनिक से जुड़े बोर्ड, पर्चियां एवं अन्य दस्तावेजी प्रमाण जुटाकर जिला कलेक्टर बालोद एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को प्रत्यक्ष लिखित शिकायत सौंपने की तैयारी कर रही है। शिकायत में दोषियों के विरुद्ध अवैध चिकित्सा पद्धति
फर्जी डॉक्टर बनकर इलाज
स्वास्थ्य अधिनियम व पीसीपीएनडीटी एक्ट के उल्लंघन के तहत तत्काल कार्रवाई, क्लीनिक सील करने एवं कानूनी प्रकरण दर्ज करने की मांग की जाएगी।
ग्रामीणों के स्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मामले में अब प्रशासन की भूमिका और कार्रवाई पर पूरे जिले की निगाहें टिकी हुई हैं।
