
छत्तीसगढ़ | विशेष संवाददाता
छत्तीसगढ़ में जल संसाधन विभाग के अंतर्गत किए जा रहे निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। नहर, बांध और स्टॉपडैम जैसे महत्वपूर्ण कार्यों पर हर वर्ष लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती नजर आ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर मरम्मत कार्य सिर्फ कागजों तक ही सीमित दिखाई देते हैं। जहां कार्य पूर्ण दिखाए जाते हैं, वहीं मौके पर स्थिति जस की तस बनी रहती है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर बजट का उपयोग किस स्तर पर और कैसे किया जा रहा है।
⚙️ मेंटेनेंस के नाम पर खर्च, जमीन पर असर नहीं?
सूत्रों के अनुसार, विभाग द्वारा हर साल नहरों और जल संरचनाओं के रखरखाव के लिए भारी राशि स्वीकृत की जाती है। लेकिन कई मामलों में यह देखा गया है कि
👉 मरम्मत कार्य अधूरे रहते हैं
👉 कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं
👉 और कुछ जगहों पर काम के कोई स्पष्ट प्रमाण भी नहीं मिलते
यदि यह स्थिति सही है, तो यह न केवल सरकारी धन के उपयोग पर सवाल खड़े करता है, बल्कि किसानों और आम जनता के हितों पर भी सीधा असर डालता है।
🏗️ बिल, माप और टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल
जानकारों के अनुसार, विभागीय कार्यों में माप पुस्तिका (MB) और बिलिंग प्रक्रिया को लेकर भी पारदर्शिता को लेकर चर्चाएं सामने आती रही हैं।
👉 छोटे कार्यों के बड़े बिल बनना
👉 एक ही कार्य को बार-बार दर्शाना
👉 टेंडर प्रक्रिया में सीमित प्रतिस्पर्धा
ऐसे मुद्दे अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
🌾 किसानों पर असर, पानी प्रबंधन पर भी सवाल
जल संसाधन विभाग की योजनाएं सीधे तौर पर किसानों से जुड़ी होती हैं। लेकिन कई क्षेत्रों में किसानों का कहना है कि
👉 समय पर पानी उपलब्ध नहीं हो पाता
👉 नहरों में पर्याप्त जल प्रवाह नहीं होता
👉 और योजनाओं का लाभ पूरी तरह नहीं मिल पाता
यदि ऐसा है, तो यह स्थिति चिंताजनक है और इसकी समीक्षा आवश्यक है।
⚖️ जवाबदेही तय करना जरूरी
जनता के बीच यह मांग उठ रही है कि
👉 विभागीय कार्यों की पारदर्शी जांच हो
👉 जमीनी स्तर पर निरीक्षण किया जाए
👉 और यदि कहीं भी अनियमितता पाई जाए, तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई हो
📝 निष्कर्ष: पारदर्शिता और गुणवत्ता ही समाधान
जल संसाधन विभाग की भूमिका राज्य के विकास और कृषि व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
यदि इन पहलुओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाता है, तो न केवल संसाधनों का सही उपयोग होगा, बल्कि जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।
🔥 प्रेस रिपोर्टर क्लब पूछता है सवाल —
👉 क्या मरम्मत कार्यों की जमीनी जांच होगी?
👉 क्या खर्च किए गए बजट का सही हिसाब सामने आएगा?
👉 क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
👉 प्रेस रिपोर्टर क्लब प्रदेश अध्यक्ष — संजय सोनी पूछता है सवाल:
कब होगी कार्रवाई?
