
बालोद / छत्तीसगढ़।
वन संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को लेकर शासन-प्रशासन द्वारा लगातार बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर देती है। ऐसा ही एक मामला बालोद जिले में सामने आया है, जहां जिला मुख्यालय से महज लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम जुगेरा में गैर इमारती लकड़ी की श्रेणी में आने वाले ‘कहुवा’ प्रजाति के पेड़ों की अवैध कटाई खुलेआम किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह अवैध कटाई किसी दूरस्थ और सुनसान जंगल क्षेत्र में नहीं, बल्कि मुख्य सड़क के किनारे हो रही है, जहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण, राहगीर और वाहन गुजरते हैं। इसके बावजूद अब तक इस मामले में जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे वन विभाग की निगरानी और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
सड़क किनारे पड़े मिले ताजा कटे पेड़ों के लट्ठे
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, जुगेरा के जंगल और खेत क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से कहुवा प्रजाति के पेड़ों की लगातार कटाई की जा रही है। कई स्थानों पर ताजा कटे हुए पेड़ों के ठूंठ स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं, वहीं बड़ी मात्रा में लकड़ियों के बड़े-बड़े लट्ठे सड़क किनारे जमा किए गए हैं। इन लट्ठों को देखकर यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि कटाई हाल ही में की गई है और इसे योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी प्रकार जंगलों और खेतों में अंधाधुंध कटाई जारी रही तो आने वाले समय में क्षेत्र की हरियाली, पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। जंगल केवल लकड़ी का स्रोत नहीं होते, बल्कि यह प्राकृतिक जीवन चक्र और पर्यावरण संतुलन के महत्वपूर्ण आधार होते हैं।
वन विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
मुख्य मार्ग के इतने करीब अवैध कटाई होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की नजर अब तक इस पर क्यों नहीं पड़ी, यह सवाल स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि जब सड़क किनारे खुलेआम पेड़ काटे जा रहे हैं तो जंगल के अंदरूनी क्षेत्रों में क्या स्थिति होगी, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल नहीं है।
स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि यदि वन विभाग की नियमित निगरानी और गश्त प्रभावी होती, तो इस प्रकार की अवैध गतिविधियों को समय रहते रोका जा सकता था। इससे यह भी संदेह उत्पन्न हो रहा है कि कहीं लकड़ी तस्करों के हौसले विभागीय लापरवाही के कारण तो नहीं बढ़ रहे हैं।
विलुप्त हो रही है ‘कहुवा’ प्रजाति
प्रेस रिपोर्टर क्लब बालोद के जिला अध्यक्ष तरुण नाथ योगी ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि
“बालोद के खेतों और जंगलों में आरी चल रही है और कहुवा प्रजाति की लकड़ियां लगातार काटी जा रही हैं, जिससे यह प्रजाति धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रही है।”
उन्होंने कहा कि यदि इस पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में इस क्षेत्र से कहुवा प्रजाति के पेड़ लगभग समाप्त हो सकते हैं।
प्रेस रिपोर्टर क्लब ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
इस मामले को लेकर प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जंगलों और खेतों में हरी कटिंग करके धड़ल्ले से कहुवा जैसे महत्वपूर्ण पेड़ों को ठेकेदारों द्वारा काटा जा रहा है, जो बेहद गंभीर विषय है।
संजय सोनी ने कहा कि वन विभाग को ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लेना चाहिए और अवैध कटाई में शामिल लोगों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो प्रेस रिपोर्टर क्लब इस पूरे मामले को लेकर वन विभाग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएगा।
कार्रवाई नहीं हुई तो होगा जन आंदोलन
प्रेस रिपोर्टर क्लब बालोद ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में जल्द जांच और कार्रवाई नहीं होती है तो बालोद प्रेस रिपोर्टर क्लब जन आंदोलन करने के लिए भी मजबूर होगा।
