
छत्तीसगढ़। राज्य के कई क्षेत्रों में संचालित पत्थर खदानों में लगातार हो रही तेज ब्लास्टिंग और भारी मशीनों से उत्खनन को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार खदानों में बार-बार किए जा रहे विस्फोटों से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों में भी भय का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि पत्थर खदानों में बड़ी-बड़ी मशीनों के माध्यम से तेज गति से उत्खनन किया जा रहा है और पत्थर निकालने के लिए लगातार विस्फोट किए जा रहे हैं। बताया जाता है कि कई बार बाहर से आने वाली टीमें ब्लास्टिंग का कार्य कर वापस चली जाती हैं। इन विस्फोटों के दौरान धूल का गुबार, तेज धमाके और जमीन में कंपन जैसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं, जिससे पर्यावरण और जनसुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार जब ब्लास्टिंग की जाती है, तब यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि क्या सभी सुरक्षा मानकों और निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं। खनन नियमों के अनुसार ब्लास्टिंग के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, तय दूरी, सीमित मात्रा में विस्फोटक और आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य होता है।
इस पूरे मामले को लेकर प्रेस रिपोर्टर क्लब छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि पत्थर खदानों में ब्लास्टिंग केवल शासन द्वारा निर्धारित नियमों और मानकों के अंतर्गत ही की जानी चाहिए। यदि कहीं भी नियमों की अनदेखी कर अवैध या अनियमित तरीके से ब्लास्टिंग की जा रही है तो यह गंभीर जांच का विषय है।
प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने माइनिंग विभाग और पुलिस प्रशासन से विशेष रूप से ध्यान देने की मांग करते हुए कहा कि खदानों में होने वाली ब्लास्टिंग की प्रक्रिया की जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी कार्य निर्धारित नियमों के तहत ही हो रहे हैं। यदि कहीं भी नियमों के विपरीत गतिविधियां सामने आती हैं तो संबंधित मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि खदान संचालकों को शासन द्वारा तय सीमा और सुरक्षा मानकों के अनुरूप ही ब्लास्टिंग करनी चाहिए। यदि नियमों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से ब्लास्टिंग की जाती है, तो ऐसे मामलों की जानकारी संबंधित विभागों और राज्य शासन को दी जाएगी।
प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यह मांग किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जनसुरक्षा और कानून के पालन के उद्देश्य से उठाई जा रही है। उन्होंने कहा कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन यदि विकास के नाम पर पर्यावरण और लोगों की सुरक्षा से समझौता किया जाता है तो यह चिंताजनक विषय बन जाता है।
प्रशासन और खनिज विभाग से अपेक्षा है कि वे इस मामले की गंभीरता को समझते हुए आवश्यक जांच कराएं और यह सुनिश्चित करें कि खनन कार्य पूर्ण रूप से नियमों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप ही संचालित हो।
