मापन मेला की तैयारी को लेकर शिक्षकों की बैठक सम्पन्न

गणित को रुचिकर व गतिविधि आधारित बनाने की पहल

प्राथमिक विद्यालयों में गणित शिक्षण को रुचिकर, व्यवहारिक एवं गतिविधि आधारित बनाने के उद्देश्य से बीआरसी भवन, बम्हनीडीह में शिक्षकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विकासखंड के विद्यालयों में 21 फरवरी को आयोजित होने वाले मापन मेला की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक दो पालियों में आयोजित हुई, जिसमें शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। बैठक का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को मापन संबंधी अवधारणाएँ — लंबाई, वजन, धारिता, समय, कैलेंडर, मुद्रा, बिल निर्माण, आकृतियों की समझ तथा आँकड़ों के उपयोग को खेल एवं गतिविधियों के माध्यम से प्रभावी ढंग से सीखाने की विधियों से परिचित कराना था, ताकि विद्यालय स्तर पर मापन मेला बच्चों के साथ बेहतर समझ के साथ आयोजित किया जा सके। उद्घाटन सत्र में बीआरसी हिरेन्द्र बेहार ने अपने संबोधन में पाठ्यपुस्तक से गतिविधियों के जुड़ाव, गतिविधि आधारित शिक्षण और “करके सीखने” की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि बच्चों को इस प्रकार तैयार किया जाए कि वे अपने दैनिक जीवन में गणित के महत्व को समझ सकें और उसका बेहतर उपयोग कर सकें। बैठक में सुगमकर्ता के रूप में गोवर्धन चंद्रा, गीतिका गबेल एवं निहारिका साहू ने सत्रों का संचालन किया तथा शिक्षकों को आठ समूहों में विभाजित कर स्टॉल आधारित गतिविधियों का अभ्यास एवं प्रस्तुतीकरण कराया गया। लंबाई मापन, वजन मापन, धारिता, समय व कैलेंडर, आकृतियाँ, परिमाप-क्षेत्रफल तथा मुद्रा व बिल निर्माण से जुड़े अलग-अलग स्टॉल बनाकर शिक्षकों ने स्वयं गतिविधियाँ करके समझा। शिक्षकों ने अमानक से मानक इकाइयों का उपयोग, स्केल एवं मीटर से वस्तुओं की माप, तराजू-बाटों से तौल, घड़ी पढ़ना, कैलेंडर पहचानना तथा नकली नोटों के माध्यम से खरीद-बिक्री जैसी गतिविधियों का अभ्यास किया। बैठक में निर्णय लिया गया कि 21 फरवरी को विकासखंड के सभी विद्यालयों में मापन मेला आयोजित किया जाएगा, जिसमें इसी प्रकार अलग-अलग स्टॉल लगाए जाएंगे। इन स्टॉलों पर बच्चे स्वयं मापन करेंगे, अनुमान लगाएंगे, वस्तुओं का तौल करेंगे तथा ग्राहक-दुकानदार बनकर खरीद-बिक्री और बिल बनाना सीखेंगे। प्रत्येक स्टॉल का संचालन बच्चों द्वारा किया जाएगा, जिससे वे समूह में कार्य करते हुए अपने अनुभव प्रस्तुत कर सकें। बैठक में शिक्षक, प्रधानपाठक एवं संकुल समन्वयकों के सहयोग से विद्यालय स्तर पर आयोजन सुनिश्चित करने पर सहमति बनी। इस पहल से बच्चों में गणित के प्रति भय कम होने, आत्मविश्वास बढ़ने तथा दैनिक जीवन में गणित के उपयोग की समझ विकसित होने की अपेक्षा व्यक्त की गई।