
(स्वास्थ्य सुरक्षा अधिनियम के संदर्भ में विशेष रिपोर्ट)
प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने औद्योगिक इकाइयों में मजदूरों की स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि स्वास्थ्य सुरक्षा अधिनियम के प्रावधानों का पालन केवल कागजों तक सीमित रहा और जमीनी स्तर पर लापरवाही जारी रही, तो प्रेस रिपोर्टर क्लब लिखित शिकायतों और ठोस साक्ष्यों के आधार पर संबंधित औद्योगिक स्वास्थ्य सुरक्षा अधिकारियों को पद से हटाने की मांग करेगा।
उन्होंने कहा कि राजनांदगांव जिले में संचालित कई फैक्ट्रियों में आज भी मजदूरों से बिना हेलमेट, बिना सेफ्टी शू, बिना मास्क, बिना दस्ताने और बिना प्राथमिक उपचार सुविधा के जोखिमपूर्ण कार्य कराया जा रहा है। जबकि स्वास्थ्य सुरक्षा अधिनियम स्पष्ट करता है कि प्रत्येक फैक्ट्री मालिक की यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वह मजदूरों को सुरक्षित कार्यस्थल, आवश्यक सुरक्षा उपकरण, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराए।
प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि निरीक्षण की प्रक्रिया कई स्थानों पर “रेंडम चेक” के नाम पर केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। जमीनी निरीक्षण, मजदूरों से प्रत्यक्ष संवाद और सुरक्षा उपकरणों की वास्तविक जांच के बजाय कागजी कार्रवाई तक सीमित रहकर खानापूर्ति की जाती है, जिससे मजदूरों की स्वास्थ्य एवं सुरक्षा व्यवस्था फाइलों में सिमटकर रह जाती है।
इस पूरे मामले में मृगनयनी इंडस्ट्रीज के मालिक त्रिलोक सेठिया का बयान सामने आना व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा—
“मेरे उद्योग में केवल चार मजदूर कार्यरत हैं, इसके बावजूद मुझ पर डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और मामले को कोर्ट तक ले जाया गया। मेरा सीधा सवाल यह है कि क्या औद्योगिक स्वास्थ्य सुरक्षा अधिकारी जिले की सभी फैक्ट्रियों में, जहां मजदूर बिना सुरक्षा मानकों के काम कर रहे हैं, उन सभी पर भी इसी तरह जुर्माना लगाकर कोर्ट में भेजने की तैयारी करेंगे?”
त्रिलोक सेठिया ने यह भी कहा कि यदि कानून सबके लिए समान है, तो उसका समान, निष्पक्ष और पारदर्शी रूप से पालन होना चाहिए, न कि चुनिंदा इकाइयों पर कठोर कार्रवाई और बाकी पर मौन।
प्रेस रिपोर्टर क्लब ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकरण को लेकर लिखित शिकायत तैयार कर संबंधित विभाग और उच्च अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। शिकायत में यह प्रमुख रूप से पूछा जाएगा कि—
क्या स्वास्थ्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सभी फैक्ट्रियों पर समान कार्रवाई की जा रही है?
क्या जिन इकाइयों में मजदूर बिना सुरक्षा उपकरणों के काम कर रहे हैं, उन्हें भी जुर्माना और न्यायालयीन कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा?
या फिर कार्रवाई चयनित मामलों तक सीमित रखी जा रही है?
प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रेस रिपोर्टर क्लब का उद्देश्य किसी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था को बदनाम करना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा अधिनियम की निष्पक्ष पालना, मजदूरों के जीवन की रक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यदि कानून का ईमानदारी से पालन कराया जाए, तो जिले की अधिकांश फैक्ट्रियों में मजदूरों को तुरंत सुरक्षा किट और स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करानी पड़ेंगी।
प्रेस रिपोर्टर क्लब ने चेतावनी दी है कि यदि आगे भी निरीक्षण में खानापूर्ति, भेदभावपूर्ण कार्रवाई और मजदूरों की सुरक्षा से समझौता सामने आता है, तो संगठन लिखित शिकायतों के माध्यम से उच्च स्तर पर सख्त कार्रवाई की मांग करेगा।
