राजनांदगांव वन परिक्षेत्र में लकड़ी की खुली लूट!फैक्ट्रियों की भट्ठियों में जल रहे हजारों पेड़, वन अमला मौन

राजनांदगांव | विशेष रिपोर्ट
राजनांदगांव वन परिक्षेत्र एवं शहर से लगे ग्रामीण अंचलों में संचालित भारी संख्या में फैक्ट्रियां आज वनों के विनाश का कारण बनती जा रही हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ग्रामीण व निर्धन वर्ग की महिलाओं एवं मजदूरों से ठेकेदारों द्वारा अवैध रूप से पेड़ कटवाकर लकड़ी फैक्ट्रियों में डंप कराई जा रही है, जिसे बाद में ईंधन और कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जा रहा है।
सबसे गंभीर तथ्य यह है कि—
👉 हजारों नहीं, बल्कि कई हजार पेड़ प्रतिवर्ष काटे जा रहे हैं,
👉 और यह सब वन विभाग की जानकारी या मिलीभगत के बिना संभव नहीं माना जा रहा।
🔥 फैक्ट्रियों की भूख, वनों का विनाश
शहर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्र में संचालित कई फैक्ट्रियों को उत्पादन के लिए भारी मात्रा में ईंधन की आवश्यकता होती है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए
ठेकेदारों का एक संगठित गिरोह
ग्रामीण क्षेत्रों से अवैध लकड़ी कटाई कर
फैक्ट्रियों तक खुलेआम आपूर्ति कर रहा है।
यह लकड़ी न तो नीलामी की होती है,
न ही किसी वैध अनुमति या परिवहन दस्तावेज के साथ लाई जाती है।
👁️‍🗨️ क्या सच में “आंख मूंदे” हैं जिम्मेदार?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
वन परिक्षेत्र के रेंजर
वन मंडल/उपवन मंडल के जिम्मेदार अधिकारी
क्या कभी इन फैक्ट्रियों का औचक निरीक्षण करते हैं?
यदि निष्पक्ष जांच हो और फैक्ट्रियों में जाकर केवल यह पूछा जाए कि—
यह लकड़ी कहां से आई?
किस पेड़ से काटी गई?
किस अनुमति से लाई गई?
तो हजारों टन अवैध लकड़ी मौके पर बरामद हो सकती है, और पूरा ठेकेदार नेटवर्क बेनकाब हो जाएगा।
✊ प्रेस रिपोर्टर क्लब की दो टूक मांग
प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने इस गंभीर पर्यावरणीय अपराध पर शासन, प्रशासन और वन विभाग से कड़े शब्दों में मांग की है कि—
सभी फैक्ट्रियों का तत्काल संयुक्त निरीक्षण कराया जाए
फैक्ट्रियों में उपयोग हो रही लकड़ी का स्रोत सत्यापन किया जाए
अवैध लकड़ी पाए जाने पर
फैक्ट्री मालिक
ठेकेदार
और संबंधित वन अधिकारियों
पर वन अधिनियम एवं दंडात्मक प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए
अवैध कटाई में संलिप्त गिरोह पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए
वनों की सुरक्षा के लिए स्थायी निगरानी तंत्र विकसित किया जाए
🌱 चेतावनी भी स्पष्ट
प्रेस रिपोर्टर क्लब ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि—
“यदि शासन-प्रशासन और वन विभाग ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले समय में उच्च स्तर पर शिकायत, जनहित याचिका और वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
यह लड़ाई केवल कानून की नहीं, भविष्य की पीढ़ियों के लिए पेड़ बचाने की लड़ाई है।”
🌳 आज कार्रवाई नहीं हुई, तो कल जंगल इतिहास बन जाएंगे।
✍️ — प्रेस रिपोर्टर क्लब | प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी