
राजनांदगांव।शहर के प्रमुख बाजार क्षेत्र में स्थित मानव मंदिर के आसपास एक परिसर में केक, पेस्ट्री, क्रीम रोल जैसे डेली नीड्स (Daily Needs) खाद्य आइटमों का निर्माण एवं बिक्री किए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खरीदी-बिक्री और सार्वजनिक आवागमन के लिए पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में फैक्ट्री स्वरूप में खाद्य उत्पादन होना नियमों की दृष्टि से जांच योग्य माना जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार संबंधित इकाई में केक, पेस्ट्री, क्रीम रोल सहित अन्य बेकरी-टाइप डेली नीड्स उत्पाद नियमित रूप से तैयार कर बाजार में बेचे जा रहे हैं। फूड सेफ्टी से जुड़े जानकारों का कहना है कि इस प्रकार के सभी उत्पाद Food Safety and Standards Act, 2006 के अंतर्गत आते हैं, जिनके लिए वैध FSSAI लाइसेंस, स्वच्छ उत्पादन क्षेत्र, सुरक्षित भंडारण, सामग्री की गुणवत्ता एवं लेबलिंग मानकों का पालन अनिवार्य है।
⚖️ कानूनी प्रावधानों के तहत जांच जरूरी
फूड सेफ्टी नियमों के अनुसार—
खाद्य उत्पादों के निर्माण में प्रयुक्त कच्चे माल की गुणवत्ता
उत्पादन स्थल की स्वच्छता व हाइजीन
तैयार उत्पादों की सेफ्टी और गुणवत्ता परीक्षण (Quality Testing)
अनिवार्य है। भीड़भाड़ वाले बाजार क्षेत्र में इन शर्तों के पालन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक बताया जा रहा है।
🚨 प्रेस रिपोर्टर क्लब की सख्त मांग
प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने कहा कि यह मामला सीधे आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा है। उन्होंने मांग की कि—
संबंधित इकाई में बनाए जा रहे केक, पेस्ट्री, क्रीम रोल जैसे डेली नीड्स उत्पादों के उत्पादन की फूड सेफ्टी विभाग द्वारा जांच कराई जाए
इन उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाए
नियमों में किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर फूड सेफ्टी अधिनियम के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने स्पष्ट कहा कि—
“आने वाले समय में प्रेस रिपोर्टर क्लब द्वारा संबंधित फैक्ट्री में तैयार किए जा रहे सभी डेली नीड्स आइटमों के सैंपल फूड सेफ्टी विभाग को सौंपकर औपचारिक शिकायत प्रस्तुत की जाएगी, ताकि कानून के तहत उनकी गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षा की निष्पक्ष जांच हो सके।”
⏳ जन-स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय
विशेषज्ञों का मानना है कि केक-पेस्ट्री जैसे उत्पाद सीधे बच्चों और आम नागरिकों द्वारा उपभोग किए जाते हैं। ऐसे में इनके उत्पादन और बिक्री में स्वच्छता या गुणवत्ता से किसी भी प्रकार की लापरवाही जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि फूड सेफ्टी विभाग इस मामले में कब और क्या ठोस कदम उठाता है।
