
साइकिल से पगडंडियों का सफर तय कर गढ़े आईपीएस, डॉक्टर और इंजीनियर, नंदेली स्कूल का शैक्षणिक रिकॉर्ड 30 से बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक पहुंचाया
पिता के संघर्ष और संस्कारों से मिली प्रेरणा, बेटी सुमिता सिदार उर्फ संजू सिदार बोलीं— पापा की तरह शिक्षा के क्षेत्र में नाम कमाना मेरा सपना

रायगढ़। शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होती, बल्कि एक सच्चा शिक्षक अपने विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देकर उन्हें सफलता के शिखर तक पहुंचाने का कार्य करता है। ऐसे ही समर्पित, संघर्षशील और प्रेरणादायी शिक्षक रहे नंदेली में प्राचार्य के पद पर अपनी सेवाएं देने वाले अमृतलाल सिदार, जिन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट एवं अतुलनीय योगदान के लिए प्रेस रिपोर्टर क्लब की ओर से छत्तीसगढ़ गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश सचिव श्याम कुमार गुप्ता एवं रायगढ़ जिला उपाध्यक्ष परमजीत सिंह भाटिया के हाथों प्रदान किया गया।
अमृतलाल सिदार का शिक्षक जीवन संघर्ष, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में उनकी पहली नियुक्ति सारंगढ़ जिले के धोबनीपाली में हुई थी। अपने लंबे सेवाकाल के दौरान उन्होंने जहां भी पदस्थापना पाई, वहां अपनी रचनात्मक कार्यशैली, अनुशासन और शिक्षा के प्रति समर्पण से एक अलग पहचान बनाई। उनके द्वारा पढ़ाए गए विद्यार्थी आज आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर सहित विभिन्न शासकीय सेवाओं में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक आईपीएस भोजराम पटेल भी उनके पढ़ाए हुए विद्यार्थियों में शामिल हैं।
नंदेली में जब अमृतलाल सिदार की पदस्थापना हुई, उस समय विद्यालय का शैक्षणिक रिकॉर्ड लगभग 30 प्रतिशत था। लेकिन अपनी मेहनत, दूरदर्शिता और बेहतर शिक्षण पद्धति से उन्होंने विद्यालय का शैक्षणिक स्तर 90 प्रतिशत तक पहुंचा दिया। यह उपलब्धि उनके शिक्षकीय जीवन की एक बड़ी मिसाल है। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद भी विद्यालय में उनके कार्यों और उनकी कमी की चर्चा होती रही। यह किसी शिक्षक के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है कि उसके जाने के बाद भी उसका कार्य और व्यक्तित्व लोगों के दिलों में जीवित रहे।
संघर्ष की राह पर चलकर शिक्षा की अलख जगाने वाले शिक्षक
अमृतलाल सिदार का जीवन आसान नहीं रहा। वे अपने निवास ग्राम जामपाली से रायगढ़ शहर तक साइकिल से पढ़ाई करने आते थे। शिक्षक बनने के बाद भी उनका संघर्ष जारी रहा। कई ऐसे दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी पदस्थापना हुई, जहां सड़क तक उपलब्ध नहीं थी। वे पगडंडियों से साइकिल चलाकर विद्यालय पहुंचते थे। बारिश के दिनों में एक हाथ से साइकिल का हैंडल संभालते और दूसरे हाथ में छाता लेकर बच्चों को पढ़ाने पहुंचते थे।
कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने कर्तव्य से समझौता नहीं किया। उनका उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर आत्मविश्वास, ऊर्जा और आगे बढ़ने की क्षमता विकसित करना था। यही कारण है कि उनके विद्यार्थी आज समाज के विभिन्न प्रतिष्ठित पदों पर पहुंचकर अपने गुरु का नाम रोशन कर रहे हैं।
श्याम कुमार गुप्ता ने कहा— समाज के गुमनाम नायकों को सम्मान दिलाना ही प्रेस रिपोर्टर क्लब का लक्ष्य
प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश सचिव श्याम कुमार गुप्ता ने कहा कि अमृतलाल सिदार जैसे व्यक्तित्व समाज की वास्तविक धरोहर हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा और विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में लगा दिया। दुर्भाग्य से ऐसे अनेक महान व्यक्तित्व अपने उत्कृष्ट कार्यों के बावजूद शासन-प्रशासन और राष्ट्रीय स्तर के सम्मान मंचों तक नहीं पहुंच पाते।
उन्होंने कहा कि प्रेस रिपोर्टर क्लब का प्रयास है कि समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले ऐसे व्यक्तित्वों को खोजकर उन्हें उचित पहचान और सम्मान दिलाया जाए। अमृतलाल सिदार जी ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षा की ज्योति जलाए रखी।
श्याम कुमार गुप्ता ने आगे कहा कि प्रेस रिपोर्टर क्लब भविष्य में ऐसे महान विभूतियों के लिए एक भव्य सम्मान समारोह आयोजित करने का प्रयास करेगा, जिसमें प्रदेश के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित कर इन प्रतिभाओं को राज्यस्तरीय मंच पर सम्मानित किया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मान केवल किसी एक व्यक्ति का सम्मान नहीं होते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और संस्कार का संदेश होते हैं।
बेटी सुमिता सिदार उर्फ संजू सिदार ने कहा— पापा से ही सीखी है शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा
अमृतलाल सिदार की चार बेटियां हैं। उनका एक बेटा भी था, जिसका दुर्भाग्यवश निधन हो चुका है। उन्होंने अपनी चारों बेटियों का पालन-पोषण अत्यंत स्नेह, संस्कार और जिम्मेदारी के साथ किया तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
उनकी बेटी सुमिता सिदार उर्फ संजू सिदार, जो स्वयं शिक्षिका हैं, ने अपने पिता के बारे में भावुक होते हुए कहा कि मम्मी-पापा ने हमारी परवरिश में कभी कोई कमी नहीं रखी। उन्होंने हमें इस काबिल बनाया कि आज हम अपने पैरों पर खड़े हैं और मैं शिक्षिका के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हूं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में मेरे पापा का योगदान बेहद सराहनीय रहा है। मैंने शिक्षा, अनुशासन, समर्पण और विद्यार्थियों के प्रति जिम्मेदारी की भावना अपने पापा से ही सीखी है। मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि मैं भी अपने पापा की तरह शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा नाम कमाऊं और उनके आदर्शों पर चलते हुए विद्यार्थियों का भविष्य संवारने का कार्य करूं।
परमजीत सिंह भाटिया ने कहा— अमृतलाल सिदार जी का सम्मान होना हम सभी के लिए गर्व की बात
प्रेस रिपोर्टर क्लब के रायगढ़ जिला उपाध्यक्ष परमजीत सिंह भाटिया ने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से अमृतलाल सिदार जी को जानते हैं और उनके यहां उनका आना-जाना भी रहा है। उनके व्यवहार, व्यक्तित्व और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों से वे पहले से परिचित हैं।
उन्होंने कहा कि जब उन्हें अमृतलाल सिदार जी के उत्कृष्ट शिक्षकीय योगदान और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी हुई, तो उन्हें बेहद गर्व महसूस हुआ। इसी भावना से उनका नाम सम्मान के लिए प्रस्तावित किया गया। आज प्रेस रिपोर्टर क्लब की ओर से उन्हें छत्तीसगढ़ गौरव सम्मान प्राप्त हुआ है, यह हम सभी के लिए प्रसन्नता और गर्व का विषय है।
अमृतलाल सिदार का सम्मान वास्तव में उस गुरु परंपरा का सम्मान है, जो स्वयं कठिनाइयों से गुजरकर दूसरों के जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। एक शिक्षक की असली पहचान उसके पद या सेवानिवृत्ति से नहीं, बल्कि उसके विद्यार्थियों की उपलब्धियों और समाज पर छोड़ी गई अमिट छाप से होती है.

