स्कूली पाठ्यक्रम में संविधान को अनिवार्य विषय बनाने की मांग, केंद्रीय शिक्षा मंत्री को भेजा पत्र

कक्षा 6वीं से 12वीं तक अलग विषय के रूप में संविधान की पढ़ाई कराने का आग्रह

संवाददाता : विजय कुमार साहू

रायपुर। भारतीय मानवाधिकार ट्रस्ट के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष सरयू प्रसाद ने देश के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों के पाठ्यक्रम में ‘भारत का संविधान’ को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी को पत्र भेजकर स्कूली शिक्षा में संविधान की अलग और व्यवस्थित पढ़ाई शुरू कराने का आग्रह किया है।

सरयू प्रसाद ने अपने पत्र में कहा है कि वर्तमान में सामाजिक विज्ञान की पुस्तकों में संविधान से संबंधित कुछ अध्याय ही शामिल हैं, जो विद्यार्थियों को संविधान की व्यापक समझ प्रदान करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने मांग की है कि कक्षा 6वीं से 12वीं तक संविधान की शिक्षा अलग अनिवार्य विषय के रूप में दी जाए, ताकि विद्यार्थी स्कूली जीवन से ही संविधान की मूल भावना, उसके सिद्धांतों और लोकतांत्रिक व्यवस्था को समझ सकें।

उन्होंने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) तथा राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) को सरल, संक्षिप्त एवं रोचक पाठ्यपुस्तक तैयार करने के निर्देश देने का भी आग्रह किया है। उनका मानना है कि विद्यार्थियों की आयु और समझ के अनुरूप संविधान की शिक्षा उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि बचपन से ही संविधान का अध्ययन करने से विद्यार्थियों में जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना विकसित होगी। साथ ही वे अपने मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों तथा कानून के शासन के महत्व को समझ सकेंगे। इससे न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान भी मजबूत होगा।

भारतीय मानवाधिकार ट्रस्ट ने इस मांग को जनहित और राष्ट्रहित से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए केंद्र सरकार एवं शिक्षा मंत्रालय से इस दिशा में सकारात्मक पहल करने की अपेक्षा जताई है।