


कोरबा। पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मादन में जिला खनिज न्यास मद (डीएमएफ) से लगभग 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित सीसी सड़क निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 600 मीटर लंबी यह सड़क निर्माण के महज तीन माह के भीतर ही जगह-जगह से उखड़ने लगी है, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है। सड़क की सतह से सीमेंट निकलने लगा है और कई स्थानों पर गिट्टियां बाहर दिखाई दे रही हैं।
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत मादन में फॉरेस्ट काष्टागार से बस्ती की ओर यह सीसी सड़क बीते दिसंबर एवं जनवरी माह में बनाई गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान ही गुणवत्ता को लेकर शिकायतें की गई थीं, लेकिन संबंधित अधिकारियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई। आरोप है कि बेस तैयार करने में लापरवाही बरती गई तथा आवश्यक पॉलिथीन शीट बिछाए बिना सीधे कंक्रीट डाल दिया गया। इसके अलावा सीमेंट और गिट्टी का अनुपात भी मानकों के अनुरूप नहीं रखा गया, जिसके चलते सड़क कुछ ही समय में क्षतिग्रस्त होने लगी।
ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर निर्माण कार्य में अनियमितता और सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गुणवत्ताहीन कार्य को पूर्ण दर्शाकर भुगतान करा लिया गया। साथ ही यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि निर्माण कार्य में स्पष्ट खामियों के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा सत्यापन और मूल्यांकन किस आधार पर किया गया।
ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य के दौरान जनपद पंचायत अधिकारियों को शिकायत दी गई थी, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब सड़क की खराब स्थिति सामने आने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, कलेक्टर एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी पाए जाने वाले सरपंच, सचिव, तकनीकी कर्मचारियों एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई तथा सरकारी राशि की वसूली की मांग भी की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो विकास कार्यों के नाम पर भ्रष्टाचार और मनमानी लगातार जारी रहेगी। उन्होंने पंचायत स्तर पर होने वाले निर्माण कार्यों की नियमित गुणवत्ता जांच सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि शासन की राशि का सही उपयोग हो सके और ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं मिल सकें।
