
साल्हेवारा क्षेत्र में उस समय भावुक और आत्मीय वातावरण देखने को मिला, जब भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष उमा चौबे अपने पति रमाकांत चौबे (अधिवक्ता) एवं परिवार के अन्य सदस्यों के साथ गंडई से साल्हेवारा पहुँचीं। यह यात्रा केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व की जीवंत मिसाल बनकर सामने आई।
🕊️ शोक में सहभागिता, संवेदना में संबल
श्रीमती उमा चौबे ने पंडित रविन्द्र शर्मा के निधन पर शोक-संतप्त परिवार से भेंट कर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए परिजनों को धैर्य और साहस बनाए रखने का संदेश दिया। उनके शब्दों में अपनापन और आँखों में संवेदना स्पष्ट झलक रही थी, जिसने शोकाकुल परिवार को मानसिक संबल प्रदान किया।
🤝 पीड़ा में साथ, आशा का संचार
इसके पश्चात श्रीमती चौबे ने अधिवक्ता दिलीप शुक्ला के निवास पर पहुँचकर उनके पुत्र शनि शुक्ला से मुलाकात की, जिनका फुटबॉल खेलते समय हाथ टूट गया था और हाल ही में उनका ऑपरेशन हुआ है। जिलाध्यक्ष ने शनि का हालचाल जाना, उसे प्रोत्साहित किया और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।
इसी क्रम में उन्होंने अधिवक्ता दिलीप शुक्ला के स्वास्थ्य की भी जानकारी ली, जो कोरोना टीकाकरण के पश्चात ब्रेन स्ट्रोक (पैरालिसिस) से प्रभावित हुए थे। यह उल्लेखनीय है कि उनका टीकाकरण एक बड़े जनसमस्या निवारण शिविर में, कलेक्टर महोदय की अध्यक्षता तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ था। जिलाध्यक्ष की इस आत्मीय भेंट से दिलीप शुक्ला, उनकी पत्नी श्रीमती उषा शुक्ला, पुत्र शनि शुक्ला एवं हिमांशु शुक्ला अत्यंत प्रफुल्लित और भावुक नजर आए।
👶 स्नेह, संस्कार और पारिवारिक अपनापन
इस अवसर पर श्रीमती उमा चौबे ने परिवार की छोटी बच्ची त्रिशा (Trisha) को स्नेहपूर्वक दुलार कर यह संदेश दिया कि राजनीति केवल मंच और भाषण नहीं, बल्कि परिवार, संस्कार और संवेदना से भी जुड़ी होती है।
🌿 प्रकृति के सान्निध्य में सामाजिक आत्मचिंतन
सामाजिक एवं पारिवारिक मेल-मिलाप के उपरांत श्रीमती उमा चौबे अपने परिवार सहित धाँस कुँवा (कोपरो) पर्यटन स्थल पहुँचीं, जहाँ उन्होंने प्राकृतिक सौंदर्य का अवलोकन किया। यह क्षण संगठनात्मक व्यस्तताओं के बीच आत्मचिंतन और ऊर्जा संचार का प्रतीक रहा।
🔥 संगठन के लिए समर्पित नेतृत्व
क्षेत्र में उनकी इस यात्रा को केवल एक दौरा नहीं, बल्कि संगठनात्मक मजबूती, सामाजिक संवेदनशीलता और जनसरोकारों से गहरे जुड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।
यह स्पष्ट है कि उमा रमाकांत चौबे संगठन को सशक्त, संवेदनशील और जन-जन से जुड़ा बनाने के लिए अखंड, प्रचंड और निरंतर पुरुषार्थ करती हुई नजर आ रही हैं।
