
करोड़ों की जमीन पर डिजिटल हमला उजागर
राजनांदगांव के लखोली निवासी शैलेश जैन ने भुईंया पोर्टल हैकिंग से जुड़ा ऐसा खुलासा किया है जिसने पूरे राजस्व विभाग में हड़कंप मचा दिया है। उनके अनुसार, पटवारी की यूज़र आईडी हैक कर उनकी करोड़ों की पुश्तैनी जमीन किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज कर दी गई।
प्रेस रिपोर्टर क्लब में किया खुलासा
जैन ने आज प्रेस रिपोर्टर क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरे प्रकरण की विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने दस्तावेज, तकनीकी रिपोर्ट और एनआईसी का प्रमाण भी सार्वजनिक करते हुए कहा—
“सच सामने लाते ही पूरी व्यवस्था घबरा गई।”
तीन महीने तक शिकायत दबाए रखी गई
शैलेश जैन का आरोप है कि हैकिंग की जानकारी देने के बावजूद तीन महीने तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उनका कटाक्ष—
“जब तक हम दस्तावेज़ लेकर नहीं दौड़े, तब तक प्रशासन ने आंखें बंद रखीं।”
फर्जी नामांतरण: 115 के तहत चाचा के नाम चढ़ी 73 डिसमिल जमीन
उन्होंने बताया कि तहसीलदार कार्यालय में 115 के तहत नामांतरण कर उनकी 73 डिसमिल जमीन उनके चाचा के नाम दर्ज कर दी गई, जबकि परिवार की ओर से आवेदन तक नहीं दिया गया था।
जैन का सवाल—
“बिना आवेदन के नामांतरण कौन करता है? सिस्टम या सिस्टम के भीतर बैठा कोई?”
फौती कराने पहुंचे, तब खुला पूरा घोटाला
मां के निधन के बाद फौती करवाने पहुँचे जैन को पता चला कि उनकी जमीन पहले ही किसी और के नाम चढ़ चुकी है।
उन्होंने कहा—
“हम गए फौती कराने, और पाया कि हमारी जमीन किसी और की कर दी गई है।”
एनआईसी की पुष्टि—आईडी हैक हुई, फिर भी छह महीने तक चुप्पी
जैन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि एनआईसी ने पुष्टि की कि पोर्टल में अनाधिकृत लॉगिन हुआ था।
इसके बाद भी छह महीने तक पूरा मामला दबा दिया गया।
जैन ने सवाल उठाया—
“जब तकनीकी पुष्टि हो चुकी थी, फिर कार्रवाई किसने रोकी?”
तथ्य सामने आते ही विभाग में हड़कंप
जैसे ही जैन ने तकनीकी दस्तावेज और रिकॉर्ड मीडिया के सामने रखे, राजस्व विभाग में हलचल तेज हो गई।
फाइलें खोली गईं, अधिकारी सक्रिय हुए और जांच शुरू की गई।
लेकिन सवाल कायम—
“सत्य दिखाए बिना विभाग क्यों नहीं जागा?”
पूरे राजस्व तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल
जैन ने कहा कि यह सिर्फ उनकी जमीन का मामला नहीं बल्कि पूरे राजस्व सिस्टम की डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर खतरा है।
उन्होंने कहा—
“अगर पटवारी की आईडी हैक हो सकती है, तो जिले की कितनी जमीनें सुरक्षित हैं?”
पीड़ित की मांग—उच्च स्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जैन ने मांग की—
पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो
इसमें शामिल हर व्यक्ति की पहचान कर कार्यवाही की जाए
डिजिटल पोर्टल की सुरक्षा को पूर्ण रूप से सुरक्षित बनाया जाए
नागरिकों में बढ़ी चिंता—‘आज उसकी जमीन, कल किसी और की?’
इस खुलासे के बाद आम लोगों में भय और असुरक्षा बढ़ गई है।
लोग पूछ रहे हैं—
“अगर सरकारी पोर्टल ही सुरक्षित नहीं, तो आम नागरिक की संपत्ति कैसे सुरक्षित रहेगी?”
