





पालखी शोभायात्रा, दहीहंडी और भजन-कीर्तन से गुंजा सेक्टर-1
सेक्टर-1 में आयोजित संत ज्ञानेश्वर महाराज संजीवनी समाधि सोहळा मंगलवार को भक्तिभाव के माहौल में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में महाराष्ट्रियन समाज के बड़ी संख्या में भक्तों ने सहभागी होकर न केवल पूजा-अर्चना की, बल्कि पारंपरिक वेशभूषा में भजन—कीर्तन कर वातावरण को आध्यात्मिक रस में सराबोर कर दिया।
सुबह ज्ञानेश्वर महाराज का अभिषेक व पूजा-अर्चना के बाद सजाई गई विशेष पालखी को समाज के सभी भक्तों ने शोभायात्रा के रूप में नगर भ्रमण कराया। पालखी में ज्ञानेश्वर महाराज और विठ्ठल महाराज विराजमान थे। जय हरी विठ्ठल और जय पांडुरंग के जयघोषों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हुआ।
बालगोपालों ने उत्साह के साथ दहीहंडी फोड़कर उत्सव को जीवंत कर दिया। इसके बाद सभी भक्तों को पारंपरिक गोपाल काला महाप्रसाद वितरित किया गया। भक्त प्रशांत कुमार क्षीरसागर ने बताया कि इस प्रसाद में पोहा, लाई, दही, शक्कर, नारियल, फल, नींबू व अचार मिलाकर तैयार किया जाता है, जो प्रेम, एकता और साझा आनंद का प्रतीक है।
कार्यक्रम में भजन-कीर्तनकार तुकाराम निकम, संतोष राठोड सहित विभिन्न कलाकारों ने हरिपाठ, अभंग और ज्ञानेश्वरी के पद प्रस्तुत कर भक्तों को भक्ति मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उनके प्रवचन में ज्ञानेश्वर महाराज के जीवन, समाधि उत्सव के महत्व और हरिनाम जप से जीवन में सफलता प्राप्त होने का संदेश प्रमुख रहा। उन्होंने समाज में भेदभाव मिटाकर प्रेम और भक्ति मार्ग अपनाने का आह्वान किया।
ढोल-नगाड़ों और महाराष्ट्रियन परंपरा के मुताबिक नृत्य-गीतों के साथ निकाली गई भव्य शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। नगर पूरे दिन जय हरी विठ्ठल, जय पांडुरंग के जयघोषों से गुंजायमान रहा।
कार्यक्रम में मुंबई से आए कीर्तनकारों सहित तबला वादक नंदू वरलीकर, हार्मोनियम वादक श्रीकांत भुताड, तथा अनेक वरिष्ठ भक्तजन उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में महाराष्ट्रियन समाज के कार्यकर्ताओं व भक्तों का विशेष योगदान रहा।
