चांपा में विजयादशमी पर धू-धू कर जला 50 फीट ऊंचा रावण

अभिनेत्री जयाप्रदा ने किया रावण दहन, दिलीप मित्तल ने छत्तीसगढ़ की ओर से भेंट की उनकी छवि अंकित कांसे की थाली

जांजगीर-चांपा। भगवान श्रीराम के ननिहाल के रूप में प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ में विजयादशमी का पर्व धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। चांपा के दशहरा मैदान में आयोजित भव्य समारोह में 50 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। फिल्म अभिनेत्री जयाप्रदा की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया। हजारों की संख्या में उपस्थित लोगों ने जय श्रीराम के जयघोष के साथ बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का उत्सव मनाया।

जयाप्रदा ने किया रावण दहन

दशहरा मैदान में शाम होते ही लोगों की भीड़ उमड़ने लगी। बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों में पर्व को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया। निर्धारित समय पर अभिनेत्री जयाप्रदा ने रिमोट का बटन दबाकर 50 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया। देखते ही देखते पुतला आग की लपटों में घिर गया और पूरा मैदान तालियों तथा जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा।

कार्यक्रम में विधायक अनुज शर्मा, पूर्व विधायक नारायण चंदेल, जशपुर के विधायक, जिले के पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर, डीएसपी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

दिलीप मित्तल ने जयाप्रदा को भेंट की विशेष कांसे की थाली

समारोह का विशेष आकर्षण उस समय देखने को मिला, जब दिलीप मित्तल ने छत्तीसगढ़ की ओर से अभिनेत्री जयाप्रदा को कांसे की थाली भेंट की। थाली पर जयाप्रदा की छवि उकेरी गई थी। यह विशेष भेंट छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला, सांस्कृतिक विरासत और अतिथि-सम्मान की भावना का प्रतीक बनी। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने इस अनूठी भेंट की सराहना की।

लोक कलाकारों ने प्रस्तुत की श्रीराम की गाथा

दशहरा उत्सव में छैंया-भुइयां के लोक कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और भगवान श्रीराम की गाथा को जीवंत किया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। धार्मिक आस्था, लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं के संगम ने आयोजन को यादगार बना दिया।

धर्म और सत्य की विजय का संदेश

विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। रावण दहन के माध्यम से समाज को अहंकार, अन्याय और बुराइयों का त्याग कर सत्य, सद्भाव, मर्यादा एवं न्याय के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।

चांपा में आयोजित यह भव्य दशहरा उत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक गौरव और जनभागीदारी का प्रतीक बना। हजारों लोगों की उपस्थिति और जय श्रीराम के जयघोष के बीच संपन्न हुए आयोजन ने विजयादशमी के पारंपरिक महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया।